रविवार, 26 दिसंबर 2010

ए. राजा की मुश्किलें बनेगी पीएसी की जांच!

2जी स्पेक्ट्रम के समक्ष आज पेश होगा कैग
ओ. पी. पाल
बहुचर्चित 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में घोटाले का खुलासा करने के बाद देश में भ्रष्टाचार को लेकर जिस प्रकार से भूचाल मचा है वह पिछले दिनों संपन्न हुए संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान विपक्ष द्वारा जेपीसी की मांग को लेकर सरकार पर विपक्ष का बोला गया हमला सभी के सामने है। इसी 2जी स्पेक्ट्रम मामले पर संसद की लोका लेखा समिति ने अपनी कार्यवही को उस मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया है जब पीएसी के सामने कैग सोमवार को पेश होकर यह बताएगी कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में सरकार को 1।76 लाख करोड़ रुपये का नुकसान कैसे हुआ, जिसका जिक्र कैग ने सरकार को सौंपी अपनी रिपोर्ट में किया है।इस मामले पर यूपीए केंद्र सरकार विपक्ष की 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति के गठन करने की मांग को लगातार ठुकराती आ रही है, जिसके लिए सरकार ने इस मामले में सीबीआई, पीएसी, ईडी, आईटी, सीवीसी आदि की जारी जांच का तर्क दे रही है। जबकि विपक्षी दल राजग व अन्य दल अलग-अलग मंच से भ्रष्टाचार को लेकर अब संसद के बाहर आंदोलन चलाते हुए कांग्रेसनीत यूपीए सरकार को अभी तक घेरे हुए है। फिर भी संसद की लोक लेखा समिति पर भी विपक्ष की काफी उम्मीदें टिकी हुई है, जिसके अध्यक्ष प्रमुख विपक्षी दल भाजपा के सांसद डा. मुरली मनोहर जोशी हैं। जोशी की अध्यक्षता वाली लोक लेखा समिति ने सोमवार को नियंत्रक और महालेखा परीक्षक यानि कैग को अपना मत देने के लिए बुलाया है, जो पीएसी को बताएगी कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के कारण सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपये का नुकसान कैसे-कैसे हुआ है। देश का सबसे बड़ा घोटाले के रूप में 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में हुए भ्रष्टाचार को लेकर संसद का पूरा शीतकालीन सत्र लगभग बिना कामकाज के ही समाप्त हो गया था। सूत्रों के अनुसार कैग अपना मत विनोद राय समिति के सामने भी पेश करेगा। कैग रिपोर्ट से इस मामले में हुए खुलासा ही भाजपा और वाम दलों समेत पूरे विपक्ष के लिए सरकार को निशाना बनाने का एक हथियार साबित हुआ है। हालांकि विपक्ष अभी भी इस मामले की जांच के लिए जेपीसी की इस मांग पर अड़िग है तो यूपीए सरकार पीएसी को इसके लिए सक्षम बताते हुए जेपीसी का गठन न करने के रवैये पर टिकी हुई है। इसी कारण संसद के शीतकालीन सत्र के समय शुरू हुए सरकार और विपक्षी दलों के बीच शुरू हुए गतिरोध का सिलसिला अभी तक समाप्त होने का नाम नहीं ले पा रहा है। इस गतिरोध के बीच सोमवार को पीएसी की बैठक को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसके सामने पेश होने के लिए स्वयं प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने भी अपना प्रस्ताव रखा है, लेकिन पीएसी के पास कोई ऐसा अधिकार नहीं है कि वह प्रधानमंत्री को पेश होने के लिए कहे। लेकिन ऐसी कोई अधिकारिक जानकारी नहीं है कि प्रधानमंत्री ने इस बारे में कोई औपचारिक निवेदन किया है। पीएसी ने जांच के लिए डीओटी, वित्त मंत्रालय, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) और इस क्षेत्र के विशेषज्ञों से भी जानकारी एकत्रित की है। संसद की लोक लेखा समिति ने इस ममले पर अपनी पिछली बैठक में ही 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में विचार और सुझाव आमंत्रित किये थे। इसके लिए लोकसभा सचिवालय ने भी एक अधिसूचना में कहा था कि इस विषय की अहमियत और इससे जुड़े राष्ट्रीय हितों को मद्देनजर रखते हुए समिति ने उन लोगों, विशेषज्ञों, संगठनों और संस्थानों से इस बारे में सुझाव और विचार मांगे थे।

शनिवार, 25 दिसंबर 2010

विकिलीक्स को चुनौती देगी नई पीडी वेबसाइट

विदेश मंत्रालय की साइट से थरूर जैसे ट्वीटरों का भी भविष्य उज्जवल
ओ.पी. पाल
सूचना एवं तकनीकी रूप से बदलती दुनिया में जहां विकिलीक्स के खुलासे से बवाल मचा हुआ है, वहीं विकिलीक्स की चुनौती से निपटने के लिए भारत के विदेश मंत्रालय ने अपनी नई पीडी वेबसाइट शुरू की है जिसकी खासियत यह होगी कि उसमें ट्वीटर, ब्लॉगर, फेसबुक, मुद्दा, स्क्राइब्ड तथा यूथटूब जैसी सामाजिक साइटों को भी डाला है। जिस ट्वीटर के कारण विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर को कुर्सी गंवानी पड़ी थी, उसी प्रकार की सामाजिक साइटों को विदेश मंत्रालय की साइट पर आ जाने से लगता है कि अब शशि थरूर जैसे ट्वीटरों का भी भविष्य उज्जवल होने की दिशा में है।
दरअसल विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को अपनी नई वेबसाइट शुरू की है जिसकी शुरूआत विदेश सचिव श्रीमती निरुपमा राव ने की। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की नीतियों की पारदर्शिता की दुहाई देते हुए कहा कि इस क्रांतिकरी सूचना एवं तकनीक के युग में विदेश मंत्रालय ने एक नई पीडी वेबसाइट शुरू की है जिसमें भारतीय कूटनीतिक साइट पर कोई भी सर्च और अनुसरण कर सकता है। विकीलीक्स के खुलासे पर पिछले सप्ताह ही विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा था कि भारत एक मुक्त और लोकतांत्रिक राष्ट्र है जो विधिसम्मत शासन का अनुपालन करत है। यदि कोई अनियमितता होती है, तो विद्यमान कानूनी तंत्रों के अंतर्गत प्रभावी और पारदर्शी तरीके से इसका शीघ्र एवं ठोस समाधान किया जाता है। भारत में कहीं भी हमारे नागरिकों के हित कल्याण से संबंधित सभी मुद्दों पर लोकतांत्रिक बहस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की स्वस्थ परम्परा है। इसलिए हमारे अंतर्राष्ट्रीय मित्रों और भागीदारों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर भी भारत ने कभी भी मुक्त और स्पष्ट चर्चा से परहेज नहीं किया। इस नई वेबसाइट शुरू करते हुए विदेश सचिव निरुपमा राव ने कहा कि नई पीडी वेबसाइट में पूरी पारदर्शिता है जिसमें लीक होने का कोई मामला है। इस वेबसाइट को शुरू करके शायद विदेश मंत्रालय ने विकीलीक्स की चुनौतियों से निपटने की कवायद शुरू की है। विदेश मंत्रालय की नई पीडी वेबसाइट से स्क्रइब्ड, मुद्दे, ब्लोगर, ट्वीटर, फेसबुक तथा यूथटूब जैसी सामाजिक वेबसाइट भी जोड़ी गई है और ईमेल के जरिए संदेश भेजने की सुविधा भी मौजूद है। इससे लगता है कि फेसबुक, ब्लागर और ट्वीटरों को अपनी टिप्पणियां करने का एक खुला मौका भी दिया गया है। गौरतलब है कि इसी साल अप्रैल में ट्वीटर पर टिप्पणियां करने का कारण ही विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर की कुर्सी गंवाने का कारण बनी थी। वही ट्वीटर अब विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर मौजूद है तो लगता है कि जहां भारत विकीलीक्स जैसी वेबसाइट को चुनौती देने की कवायद कर रही है, वहीं शशि थरूर जैसे ट्वीटरों के भविष्य को भी उज्जवल बनाने की दिशा में यह वेबसाइट शायद मददगार हो सकेगी। इस नई वेबसाइट पर भारत सरकार की सूचनाओं के लीक होने के सवाल पर विदेश सचिव का मानना था कि जो पारदर्शी होगा तो उसमें लीक क्या हो सकता है।

बुधवार, 22 दिसंबर 2010

आखिर कब तक आंसू बहायेगी प्याज?

प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप से 30 प्रतिशत दाम गिरे
दो-तीन सप्ताह तक दाम बढ़े रहेंगे: कृषि मंत्री
 दस दिन में गिर जाएंगे प्याज के दाम: कृषि सचिव
मार्च से पहले सामान्य नहीं होंगी प्याज की दरें: विशेषज्ञ
ओ.पी. पाल
 जब कांग्रेस का महाधिवेशन अंतिम चरणों में था तो देश में प्याज के दामों में अचानक हुई वृद्धि ने कांग्रेसनीत यूपीए सरकार के सामने मुश्किलें खड़ी कर दी, हालांकि प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप के बाद 24 घंटे के भीतर ही प्याज की सातवें आसमान पर पहुंची कीमतों में 30 प्रतिशत की कमी भी आ गई। देश की जनता के लिए प्याज के दामों पर कृषि मंत्री पवार ने उसी तरह का बयान दिया जिस प्रकार पिछले साल संसद सत्र के दौरान चीनी के दामों में हुई वृद्धि को लेकर दिये थे। मसलन यह कि प्याज की कीमतों में गिरावट को लेकर केंद्र सरकार कुछ कह रही तो कृषि मंत्री ऐसा बयान देने में फिर पीछे नहीं रहे जिससे सरकार की मुश्किलें कम होने वाली नहीं है। भ्रष्टाचार के खिलाफ राजग की रैली में जहां घोटालों और भ्रष्टाचार के मुद्दे छाए रहे वहीं प्याज की कीमत बेतहाशा वृद्धि पर भी राजग ने यूपीए सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। राजग की रैली और कांग्रेस के 83वें महाधिवेशन के बीच प्याज की कीमतों से आम जनता के ऐसे आंसू बहाये कि इसमें सीधे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को दखल देना पड़ा और प्रधानमंत्री ने कृषि मंत्री शरद पवार से पूछा कि आखिर हफ्ते भर में प्याज के दाम इतने कैसे बढ़ गए। इसका नतीजा यह हुआ कि सरकार के दखल के बाद प्याज के निर्यात पर तत्काल पर तुरंत रोक लगाई गई और प्रधानमंत्री ने देश को भरोसा दिलाया कि दाम कम करने के लिए तमाम उपाय किए जाएंगे। कृषि मंत्री शरद पवार ने उसी तरह के बयानों की झड़ी लगा दी जिस प्रकार पिछले साल संसद के सत्र के दौरान चीनी के दामों में हुई बेतहाहशा वृद्धि के दौरान देकर सरकार के सामने संकट पैदा कर दिये थे। शरद पवार ने मंगलवार को कहा था कि प्याज की कीमतें अगले 2-3 सप्ताह ज्यादा ही रहेगी और उसी के बाद स्थिति सामान्य हो सकेगी। जबकि उनके इस बयान के विपरीत प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप से 24 घंटे के भीतर 30 फीसदी दाम कम हो सके। पवार तो यहां तक भी कह गये कि सरकार मांग पूरी करने के लिए प्याज का आयात नहीं करेगी, लेकिन सूत्रों के अनुसार सरकार द्वारा 450 टन प्याज पाकिस्तान से मंगवाया गया है। प्याज की दरें बढ़ने पर प्रधानमंत्री ने संबन्धित मंत्रियों को पत्र लिखकर कहा है कि प्याज की बढी कीमतों को कम करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाये जाएं ताकि प्याज की कीमतों को सामान्य स्तर पर लाया जाए। कृषि मंत्री शरद पवार के बयान के उलट कृषि सचिव पीके बसु ने कहा कि नई फसल आने के बाद प्याज की कीमत अगले 7 से 10 दिन में कम हो जाएंगी। प्याज के दामों में भले ही निर्यात पर रोक के बाद करीब 30 फीसदी की गिरावट आई हो, लेकिन अब भी देश की ज्यादातर मंडियों में प्याज 40 से 50 रुपये किलो बिक रही है। लेकिन अब भी यह दाम आम आदमी की पहुंच से प्याज को दूर किए हुए हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि प्याज का यह संकट अगले दो-तीन हफ्ते नहीं बल्कि मार्च तक जारी रहेगा। मार्च में रबी की फसल के बाजार में आ जाने के बाद ही यह संकट दूर होगा। सरकार ने प्याज की कीमतों को नीचे लाने के लिए कोशिशें तेज कर दी हैं। हालांकि वित्त मंत्रालय ने प्याज के आयात पर ड्यूटी में पांच फीसदी की कमी का ऐलान कर दिया है। इससे पहले सरकार ने प्याज के निर्यात पर रोक लगा दी थी।

संसद में अब वो सांसद नहीं जो....

इतिहास में पहली बार विशुद्ध रूप में दिखे
ओ.पी. पाल
संसद में अब जमीन से जुड़े सांसदों की कमी ही शायद नागरिक सुधारों व बेहतर सेवाओं को सशक्त बनाने के बजाय कमजोर हो रही है, जहां जन प्रतिनिधियों के रूप में उद्योगपति, व्यपारी, कारोबारी या फिर बिल्डर्स ही संसद में पहुंच रहे हैं जिसके कारण उनके हितों में टकराव की संभावनाओं को कम नहीं आंका जा सकता। इस प्रकार का खुलासा नेशनल सोशल वॉच नामक संस्था ने शासन तथा विकास 2010 पर जारी अपनी सिटीजन रिपोर्ट में किया है। नागरिकों को सुधारों के माध्यम से बेहतर सेवाओं की मांग करने के लिए और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से समाज के वॉचडॉग का काम करने वाली इस संस्था ने रिपोर्ट में शासन के मुख्य चार संस्थानों संसद, न्यायपालिका, कार्यकारी एवं स्थानीय सरकार का मूल्यांकन किया है। संसद के हाल ही में संपन्न हुए शीतकालीन सत्र के दौरान भारत की संसद के इतिहास में पहली सांसदों को विषुद्ध रूप से उनके कामकाज एवं प्रदर्शन के आधार देखा गया है। नेशनल सोशल वॉच के राष्ट्रीय संयोजक अमिताभ बेहर कहते हैं कि इस जारी रिपोर्ट से सांसदों को भविष्य में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरणा प्रोत्साहन मिलना चाहिए। इस जारी रिपोर्ट सांसदों के कामकाज करने की क्षमता में भी कमी आई है, जिसका कारण है कि लोकसभा में कुल सांसदों में से 25 प्रतिशत सांसद या तो उद्योगपति हैं या फिर व्यापारी, कारोबाबरी या बिल्डर्स हैं जिनके कारण उनके हितों में टकराव की संभावना कम करके नहीं आंकी जा सकती। स्थाई समितियों की सदस्यता में भी हतों में टकराव बढ़ा है यानि समितियों की प्रणालियों के कार्यकाल, स्थाई तथा वित्तीय समितियों में सदस्यों की संख्या को कम कर 20 तक लाने के लिए कड़ाई से युक्तिकरण की बेहद आवश्यकता है। इसी कारण वित्तीय संकट, मूल्य वृद्धि तथ मौसम में आ रहे बदलावों जैसे प्रमुख मामलों में राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मुख्य नीतियों के क्रियानवयन में नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। संसद में जमीन से जुडे प्रतिनिधियों की हो रही कमी का ही कारण है कि संसद में होने वाली चर्चाओं के दौरान विभिन्न विषयों पर सांसदों में विशेषज्ञता का न होना भी एक बड़ी खामी बनी हुई है। वहीं संसद सत्र के दौरान सांसदों की उपस्थिति पर भी सवाल उठाये गये हैं। जहां तक प्रश्नकाल का सवाल है उसके लिए रिपोर्ट में एक घटना का जिक्र किया गया जब लोकसभा में वर्ष 2009 के शीतकालीन सत्र का 30 नवंबर का वह दिन बेहद चौंकाने वाला था जब लोकसभा में जिन 28 सांसदों के तारांकित सवाल सूचीबद्ध थे तो उनमें से एक भी सांसद सदन में उपस्थित नहीं था। भारतीय संसद के इतिहास मे यह पहला मौका था, जब प्रश्नकाल पूरी तरह से धाराशायी हुआ। तभी तो लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार और राज्यसभा के सभापति मोहम्मद हामिद अंसारी ने प्रश्नकाल को अत्यंत महत्वपूर्ण करार देते हुए कड़े कदम उठाते हुए नियमों में बदलाव किये ताकि प्रश्नकाल धाराशायी न हों। लेकिन इस इतिहास की हाल ही में संपन्न हुए शीतकालीन सत्र ने पूरे सत्र में प्रश्नकाल ही नहीं सभी कामकाज को धाराशायी करने का काम किया है। इस रिपोर्ट में सर्वश्रेष्ठ कार्य करने वाले सांसदों का भी खुलासा किया है जिसमें चौदवीं लोकसभा में सर्वश्रेष्ठ कार्य करने वालों की सूची में शामिल सांसद पन्द्रहवीं लोकसभा में जगह ही नहीं बना पाए। इसका कारण यही बताया गया कि दोनों सदनों में धनाढ्य सांसदों की संख्या ज्यादा बढ़ती जा रही है।

बैडमिंटन को चाहिए विदेशी कोच

 ओ.पी. पाल
देश की प्रसिद्ध बैडमिंटन खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली चैंपियनशिप खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए मददगार रहे हैं, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय स्तर के के लिए बेहतर प्रशिक्षण के लिए भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों की मदद को बढ़ाने की जरूरत है।हरियाणा बैडमिंटन एसोसिएशन के कार्यक्रम से इतर बैडमिंटन खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा ने यहां कहा कि पिछले तीन-चार सालों से भारत में बैडमिंटन का अच्छा प्रदर्शन देखने को मिला है। इसमें कुछ खिलाड़ियों ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते हैं जिसके नए उदाहरण राष्ट्रमंडल खेलें अ‍ैर एशियन बैडमिंटन चैंपियनशिप में सायना नेहवाल के रूप में सामन हैं। गुट्टा का कहना था कि भारत में बैडमिंटन प्रतिभाओं की कमी नहीं है, बल्कि उन्हें खोजने के प्रयास तेज करके प्रायोजकों को उनकी मदद के लिए आगे आने की जरूरत है। उन्होंने क्रिकेट की तरह बैडमिंटन को स्कूल, जिला व राज्य स्तर पर प्रोत्साहन देने के लिए कोच उपलब्ध कराए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि घरेलू स्तर पर अधिक से अधिक बैडमिंटन टूर्नामेंट कराने के लिए भी प्रायोजकों को हर स्तर पर मदद देने के लिए तत्पर रहना जरूरी है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर के लिए बैडमिंटन खिलाड़ियों के लिए ज्वाला गुट्टा न विदेशी कोच की भी वकालत की और कहा कि जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तरों पर नियमित रूप से टूनार्मेंटों का आयोजन भी बैडमिंटन के नए खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय दर्जे पर लाने के लिए मददगार साबित होगा। अपने व्यक्तिगत प्रदर्शन के बारे में पूछे जाने पर ज्वाला गुट्टा ने कहा कि उसकी विश्वस्तर पर गिरती रैंकिंग का कारण उसका खराब प्रदर्शन बेमाने है, जबकि हकीकत यह है कि कई बैडमिंटन टूर्नामेंटों में हिस्सा न लेने के कारण रैंकिंग नीचे आई है। भारत की स्टार युगल खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा ने कहा कि उसने अश्विनी पोनप्पा के साथ मिलकर राष्ट्रमंडल खेलों की महिला युगल स्पर्धा का स्वर्ण जीता था। ज्वाला ने कहा कि वह राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों की तैयारी के लिए उससे पहले काफी टूनार्मेंटों में नहीं खेल सकी और उसके बाद भी किन्हीं कारणवश उसने विश्राम लिया है जिसके कारण रैंकिंग गिरी है। लेकिन ज्वाला कहती हैँ कि लगभग एक महीने के विश्राम के बाद वह अब अपने आपको तरोताजा महसूस कर रही हैं और वह अब शीघ्र ही ओलंपिक की तैयारियों के लिए अभ्यास करने में व्यवस्त हो जाएगीं। ज्वाला मिश्रित युगल में वी. दीजू को अपना सबसे बेहतर जोड़ीदार मानती हैं और वह अश्विनी पनप्पा के साथ भी मिश्रित युगल मैच खेलना पसंद करेंगी। गौरतलब है कि ज्वाला ने अश्विनी पोनप्पा के साथ मिलकर राष्ट्रमंडल खेलों की महिला युगल स्पर्धा का स्वर्ण जीता था लेकिन इस दोनों की इस स्पर्धा में विश्व रैंकिंग 30 तक गिर गई है जबकि इसी साल यह जोड़ी छठे नंबर पर भी काबिज थी। दूसरी तरफ वी. दीजू के साथ मिश्रित युगल में भी वह 40वें पायदान पर खिसक गई है। वी. दीजू के साथ इस साल वह छठे नंबर पर थी।

आक्रमण को बनाया बचाव का हथियार

कांग्रेस महाधिवेशन में छाया रहा भ्रष्टाचार का मुद्दा
ओ.पी. पाल
प्रसिद्ध कहावत है कि आक्रमण ही बचाव का सर्वश्रेष्ठ उपाय है। भ्रष्टाचार से कई तरह के आरोपों से घिरी कांग्रेस ने अब शायद इस कहावत को ही अपना मूलमंत्र बना लिया है। इस कड़ी में कांग्रेस महधिवेशन में रविवार को शुरू हुए विपक्ष पर हमले सोमवार को भी जारी रहे। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, महासचिव राहुल गांधी या फिर प्रधानमंत्री मनमोहन ही क्यों न रहे हों सभी ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर विपक्ष पर हमले करके आक्रमक तेवरों में पलटवार किया। सोनिया गांधी ने तो कांग्रेसजनों का यहां तक आव्हान किया कि वे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से आक्रामकता के साथ निपटते हुए उनके दोहरें मापदंड को जनता के सामने बेनकाब करने का काम करें।सवा सौ साल की राजनीतिक पार्टी कांग्रेस का बंदेमातरम् से शुरू हुआ तीन दिवसीय 83वां महाधिवेश राष्टÑगान के साथ ही सोमवार को सम्पन्न हो गया है। यह अधिवेशन ऐसे समय हुआ जब भ्रष्टाचार और घोटाले के मुद्दे पर कांग्रेस विपक्षी दलों से चौतरफा घिरी हुई है, जिसके लिए यह अधिवेशन चुनौतियों से कम तो नहीं था, लेकिन इस महाधिवेशन में कांग्रेस ने भ्रष्टाचार के आरोपों के चक्रव्यूह से बाहर निकलने का रास्ता ही नहीं खोजा, बल्कि वह प्रसिद्ध कहावत ‘आक्रमण ही बचाव का सर्वश्रेष्ठ उपाय है’ चरितार्थ होती नजर आई जिसे कांग्रेस ने अपना मूलमंत्र भी बनाया है। भ्रष्टाचार को देश व समाज के विकास में बाधक बताते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जहां भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग का ऐलान किया, वहीं विपक्षी दलों खासकर भाजपा पर इस मुद्दे को लेकर हमले भी बोले। कांग्रेस के पिछले दो दिनों में महाधिवेशन के मंच से सोनिया ने ही नहीं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी, गृहमंत्री पी. चिदंबरम, वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के अलावा अन्य केई मंत्रियों व कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेसनीत यूपीए सरकार की उपलब्धियों का बखान करते हुए भ्रष्टाचार पर विपक्ष पर हमले किये। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने तो कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को हिदायत भी दी कि वे ऐसे अधिकारों (भूमि आवंटन के विवेकाधीन अधिकार) की समीक्षा करके उनका जल्दी से जल्दी निपटान करके एक मिसाल कायम करें। सोनिया गांधी महाधिवेशन में भ्रष्टाचार पर विपक्ष पर हमला बोलने में रविवार की अपेक्षा सोमवार को अधिक आक्रामक तेवरों में नजर आई, जिन्होंने देशभर से आए कांग्रेसजनों का आव्हान करते हुए कहा कि वे विरोधी दलों के बेबुनियाद आरोपों के खिलाफ जनता के बीच जाकर प्रचार करें और भ्रष्टाचार पर दोहरे मापदंड अपना रही भाजपा को बेनकाब करें। महाधिवेशन में वैसे तो मुद्दे अनेक थे, लेकिन भ्रष्टाचार का मुद्दा ही ऐसा था, जिससे कांग्रेस भयभीत थी और इसी चक्रव्यूह से निकलने के लिए कांग्रेस ने आक्रामकता की नीति से विपक्ष का मुकाबला करने की नीतियों का ऐलान किया। इस आक्रामकता के मूलमंत्र को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जहां चिंतन शिविर आयोजित करने की घोषणा की तो वहीं सरकार की उपलब्धियों और प्रमुख विपक्षी दल भाजपा के दोहरे मापदंड को बेनकाब करने के लिए जन जागरण अभियान चलाने का भी ऐलान ही नहीं किया, बल्कि सोनिया ने भ्रष्टाचार के मुद्दे से ही आमने-सामने आकर मुकाबला करने की बात कही।कांग्रेसनीत यूपीए सरकार के दूसरे शासनकाल में जिस प्रकार से वह भ्रष्टाचार और घोटालों के मुद्दे पर घिरी रही है उसमें 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले ने कांग्रेस की राजनीतिक तौर पर ज्यादा फजीहत हुई है, जिसके कारण संसद का समूचा शीतकालीन सत्र का सत्रावासन लगभग बिना किसी कामकाज के ही कराना पड़ा। इसी मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने भी कांग्रेस का बचाव करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और 2जी स्पेक्ट्रम आंवटन के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि कांग्रेस ने महाधिवेशन में आक्रामक तेवरों में आईपीएल में शशि थरूर, आदर्श हाउसिंग सोसायटी में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण और राष्ट्रमंडल खेलों में अनियमितताओं में सुरेश कलमाडी की तरह 2जी स्पेक्ट्रम में संचार मंत्री ए. राजा को हटाने की दुहाई देते हुए कर्नाटक में जमीन घोटाले में भाजपा के दोहरे मापदंड अपनाने की नीति के साबित करने का भी प्रयास किया है। भ्रष्टाचार के मुद्दे से शुरू हुआ कांग्रेस का महाधिवेशन भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग के ऐलान के साथ ही संपन्न हो गया है।

मंत्रियों को फटकार तो नेताओं को नसीहत

तो..अब कांग्रेस कारपोरेट शैली में करेगी काम तो
ओ.पी. पाल
कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया ने केंद्र सरकार के मंत्रियों को फटकार लगाते हुए संगठन के बड़े पदों पर बैठे वरिष्ठ  नेताओं को भी नसीहत दी। उन्होंने आम कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संगठन की शक्ति और कान बताते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि कार्यकर्ता के समक्ष कांग्रेसनीत केंद्र सरकार के मंत्रियों और पार्टी के नेताओं को अपनी ईमानदारी और जवाबदेही के प्रति किसी किस्म के संदेह की गुंजाइश नहीं छोड़नी चाहिए। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित कांग्रेस के 83वें महाधिवेशन में उद्घाटन भाषण के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने कहा कि देश के छोटे स्थान पर बैठा कांग्रेस कार्यकर्ता संगठन की कान व आंख यानि ताकत है जिसे नजर अंदाज करने की शिकायतें आ रही हैं। उन्होंने अपने संगठन को अपने अंदर कमियों के देखने की बात करते हुए स्पष्ट किया कि केंद्रीय मंत्री जब भी कहीं अपना दौरा करें तो वहां की कांग्रेस इकाई से भी मिलें और आम कार्यकर्ता की बात सुने। उन्होंने कहा कि हमें अपनी कमजोरियों पर भी ध्यान देना होगा। पार्टी भले ही गौरवशाली अतीत की समृद्ध विरासत से पूर्ण है लेकिन भविश्य की चुनौतियों का सामना तभी किया जा सकेगा जब हम समय के साथ अपने कामकाज की शैली में भी बदलाव लाएं। वहीं उन्होंने संगठन में ऊंचे औधे पर बैठे नेताओं को भी साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस अब कारपोरेट शैली में काम करेगी, क्योंकि बिहार चुनाव नतीजा इस तरह का सबक दे चुकें हैं। उन्होंने कांग्रेस नेताओं को सादगी और मितव्ययता के रास्ते पर जाने का संकेत देते हुए कहा कि पार्टी नेताओं को अपनी ईमानदारी और जवाबदेही के प्रति किसी किस्म के संदेह की गुंजाइश नहीं छोड़नी चाहिए, क्योंकि आम कार्यकर्ता की उपेक्षा अब बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने इसके लिए जल्द ही एक चिंतन शिविर का आयोजन करने की भी घोषणा की, जिसमें संगठन के कामकाज में बदलाव करके इसे कारपोरेट की शैली में काम करने लायक बनाने से जुडे तमाम अहम फैसले लिए जाएंगे। साथ ही उन्होंने संगठन को और ज्यादा युवा बनाने का भी संकल्प दोहराया, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि जल्द ही पार्टी संगठन में राहुल गांधी की भूमिका और बढेगी। उन्होंने कहा कि हम एक विरासत के उत्तराधिकारी हैं। यह विरासत संवेदनाओं की विरासत है। इसलिए हमारे लिए जरूरी है कि हम आत्मचिंतन करें। यही इस महाअधिवेशन का उद्देश्य है। हम सिर्फ अपने अतीत का उत्सव मनाने के लिए नहीं जुटे हैं। श्रीमति गांधी ने नेहरू, इंदिरा और राजीव गांधी को याद करते हुए कहा कि हमें उनकी विरासत को आगे बढ़ाना है।
राहुल की संगठन में बढेगी भूमिका
पार्टी में जल्द ही राहुल गांधी को आगे लाने का संकेत देते हुए सोनिया ने कहा कि उम्र और अनुभव के अलावा संगठन को युवा शक्ति और जीवन्तता की जरूरत है, इसीलिए हम ज्यादा से ज्यादा युवाओं के प्रवेश का स्वागत करते हैं। राहुल गांधी के नेतृत्व में युवक कांग्रेस और छात्र संगठन एनएसयूआई द्वारा किए गए सदस्यता अभियान की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि इसके सकारात्मक परिणा दिख रहे हैं। बिहार के विधानसभा चुनाव परिणामों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी की अब जमीनी स्तर पर नए सिरे से खडा करने के अलावा हमारे पास दूसरा कोई रास्ता नहीं है। आगे का मार्ग लंबा और कठिन है लेकिन दृढ रहेंगे और सफल होंगे।
चुनावी मशीन न बने कांग्रेस
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को आगाह किया कि देश की इस सबसे पुरानी और बड़ी पार्टी को एक विशाल चुनावी मशीन से कुछ ज्यादा बनने की जरूरत है अ‍ैर पार्टी को जमीनी स्तर पर नये सिरे से स्थापित करने के अलावा हमारे पास न तो कोई विकल्प है और न ही कोई शार्टकट। सोनिया ने बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी की शर्मनाक हार के संदर्भ में कहा कि उन्हें अच्छी तरह मालूम है कि कुछ प्रदेशों में बहुत ज्यादा काम करने की जरूरत है। हाल ही में बिहार के चुनावों ने यह अच्छी तरह साफ कर दिया है कि पार्टी को जमीनी स्तर से नये सिरे से बनाने के अलावा हमारे पास और कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि आगे रास्ता लंबा और बहुत मुश्किल है लेकिन पार्टी को जमीनी स्तर से नये सिरे से बनाने के अलावा और कौई आसान रास्ता नहीं है।
संयम व निष्ठा की प्रतिमूति मनमोहन
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि राष्ट्र की समृद्धि के प्रति प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अचल समर्पण की वजह से पार्टी उनके साथ मजबूती से खड़ी है। सोनिया ने कहा कि मनमोहन सिंह ने राष्ट्र की प्रगति और समृद्धि के प्रति दृढ़ समर्पण दशार्या है। पार्टी उनके साथ मजबूती से खड़ी है। प्रधानमंत्री की प्रशंसा करते हुए सोनिया ने कहा कि वह 'संयमऔर निष्ठा' की प्रतिमूर्ति हैं।