रविवार, 26 दिसंबर 2010

ए. राजा की मुश्किलें बनेगी पीएसी की जांच!

2जी स्पेक्ट्रम के समक्ष आज पेश होगा कैग
ओ. पी. पाल
बहुचर्चित 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में घोटाले का खुलासा करने के बाद देश में भ्रष्टाचार को लेकर जिस प्रकार से भूचाल मचा है वह पिछले दिनों संपन्न हुए संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान विपक्ष द्वारा जेपीसी की मांग को लेकर सरकार पर विपक्ष का बोला गया हमला सभी के सामने है। इसी 2जी स्पेक्ट्रम मामले पर संसद की लोका लेखा समिति ने अपनी कार्यवही को उस मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया है जब पीएसी के सामने कैग सोमवार को पेश होकर यह बताएगी कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में सरकार को 1।76 लाख करोड़ रुपये का नुकसान कैसे हुआ, जिसका जिक्र कैग ने सरकार को सौंपी अपनी रिपोर्ट में किया है।इस मामले पर यूपीए केंद्र सरकार विपक्ष की 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति के गठन करने की मांग को लगातार ठुकराती आ रही है, जिसके लिए सरकार ने इस मामले में सीबीआई, पीएसी, ईडी, आईटी, सीवीसी आदि की जारी जांच का तर्क दे रही है। जबकि विपक्षी दल राजग व अन्य दल अलग-अलग मंच से भ्रष्टाचार को लेकर अब संसद के बाहर आंदोलन चलाते हुए कांग्रेसनीत यूपीए सरकार को अभी तक घेरे हुए है। फिर भी संसद की लोक लेखा समिति पर भी विपक्ष की काफी उम्मीदें टिकी हुई है, जिसके अध्यक्ष प्रमुख विपक्षी दल भाजपा के सांसद डा. मुरली मनोहर जोशी हैं। जोशी की अध्यक्षता वाली लोक लेखा समिति ने सोमवार को नियंत्रक और महालेखा परीक्षक यानि कैग को अपना मत देने के लिए बुलाया है, जो पीएसी को बताएगी कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के कारण सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपये का नुकसान कैसे-कैसे हुआ है। देश का सबसे बड़ा घोटाले के रूप में 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में हुए भ्रष्टाचार को लेकर संसद का पूरा शीतकालीन सत्र लगभग बिना कामकाज के ही समाप्त हो गया था। सूत्रों के अनुसार कैग अपना मत विनोद राय समिति के सामने भी पेश करेगा। कैग रिपोर्ट से इस मामले में हुए खुलासा ही भाजपा और वाम दलों समेत पूरे विपक्ष के लिए सरकार को निशाना बनाने का एक हथियार साबित हुआ है। हालांकि विपक्ष अभी भी इस मामले की जांच के लिए जेपीसी की इस मांग पर अड़िग है तो यूपीए सरकार पीएसी को इसके लिए सक्षम बताते हुए जेपीसी का गठन न करने के रवैये पर टिकी हुई है। इसी कारण संसद के शीतकालीन सत्र के समय शुरू हुए सरकार और विपक्षी दलों के बीच शुरू हुए गतिरोध का सिलसिला अभी तक समाप्त होने का नाम नहीं ले पा रहा है। इस गतिरोध के बीच सोमवार को पीएसी की बैठक को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसके सामने पेश होने के लिए स्वयं प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने भी अपना प्रस्ताव रखा है, लेकिन पीएसी के पास कोई ऐसा अधिकार नहीं है कि वह प्रधानमंत्री को पेश होने के लिए कहे। लेकिन ऐसी कोई अधिकारिक जानकारी नहीं है कि प्रधानमंत्री ने इस बारे में कोई औपचारिक निवेदन किया है। पीएसी ने जांच के लिए डीओटी, वित्त मंत्रालय, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) और इस क्षेत्र के विशेषज्ञों से भी जानकारी एकत्रित की है। संसद की लोक लेखा समिति ने इस ममले पर अपनी पिछली बैठक में ही 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में विचार और सुझाव आमंत्रित किये थे। इसके लिए लोकसभा सचिवालय ने भी एक अधिसूचना में कहा था कि इस विषय की अहमियत और इससे जुड़े राष्ट्रीय हितों को मद्देनजर रखते हुए समिति ने उन लोगों, विशेषज्ञों, संगठनों और संस्थानों से इस बारे में सुझाव और विचार मांगे थे।

शनिवार, 25 दिसंबर 2010

विकिलीक्स को चुनौती देगी नई पीडी वेबसाइट

विदेश मंत्रालय की साइट से थरूर जैसे ट्वीटरों का भी भविष्य उज्जवल
ओ.पी. पाल
सूचना एवं तकनीकी रूप से बदलती दुनिया में जहां विकिलीक्स के खुलासे से बवाल मचा हुआ है, वहीं विकिलीक्स की चुनौती से निपटने के लिए भारत के विदेश मंत्रालय ने अपनी नई पीडी वेबसाइट शुरू की है जिसकी खासियत यह होगी कि उसमें ट्वीटर, ब्लॉगर, फेसबुक, मुद्दा, स्क्राइब्ड तथा यूथटूब जैसी सामाजिक साइटों को भी डाला है। जिस ट्वीटर के कारण विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर को कुर्सी गंवानी पड़ी थी, उसी प्रकार की सामाजिक साइटों को विदेश मंत्रालय की साइट पर आ जाने से लगता है कि अब शशि थरूर जैसे ट्वीटरों का भी भविष्य उज्जवल होने की दिशा में है।
दरअसल विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को अपनी नई वेबसाइट शुरू की है जिसकी शुरूआत विदेश सचिव श्रीमती निरुपमा राव ने की। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की नीतियों की पारदर्शिता की दुहाई देते हुए कहा कि इस क्रांतिकरी सूचना एवं तकनीक के युग में विदेश मंत्रालय ने एक नई पीडी वेबसाइट शुरू की है जिसमें भारतीय कूटनीतिक साइट पर कोई भी सर्च और अनुसरण कर सकता है। विकीलीक्स के खुलासे पर पिछले सप्ताह ही विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा था कि भारत एक मुक्त और लोकतांत्रिक राष्ट्र है जो विधिसम्मत शासन का अनुपालन करत है। यदि कोई अनियमितता होती है, तो विद्यमान कानूनी तंत्रों के अंतर्गत प्रभावी और पारदर्शी तरीके से इसका शीघ्र एवं ठोस समाधान किया जाता है। भारत में कहीं भी हमारे नागरिकों के हित कल्याण से संबंधित सभी मुद्दों पर लोकतांत्रिक बहस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की स्वस्थ परम्परा है। इसलिए हमारे अंतर्राष्ट्रीय मित्रों और भागीदारों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर भी भारत ने कभी भी मुक्त और स्पष्ट चर्चा से परहेज नहीं किया। इस नई वेबसाइट शुरू करते हुए विदेश सचिव निरुपमा राव ने कहा कि नई पीडी वेबसाइट में पूरी पारदर्शिता है जिसमें लीक होने का कोई मामला है। इस वेबसाइट को शुरू करके शायद विदेश मंत्रालय ने विकीलीक्स की चुनौतियों से निपटने की कवायद शुरू की है। विदेश मंत्रालय की नई पीडी वेबसाइट से स्क्रइब्ड, मुद्दे, ब्लोगर, ट्वीटर, फेसबुक तथा यूथटूब जैसी सामाजिक वेबसाइट भी जोड़ी गई है और ईमेल के जरिए संदेश भेजने की सुविधा भी मौजूद है। इससे लगता है कि फेसबुक, ब्लागर और ट्वीटरों को अपनी टिप्पणियां करने का एक खुला मौका भी दिया गया है। गौरतलब है कि इसी साल अप्रैल में ट्वीटर पर टिप्पणियां करने का कारण ही विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर की कुर्सी गंवाने का कारण बनी थी। वही ट्वीटर अब विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर मौजूद है तो लगता है कि जहां भारत विकीलीक्स जैसी वेबसाइट को चुनौती देने की कवायद कर रही है, वहीं शशि थरूर जैसे ट्वीटरों के भविष्य को भी उज्जवल बनाने की दिशा में यह वेबसाइट शायद मददगार हो सकेगी। इस नई वेबसाइट पर भारत सरकार की सूचनाओं के लीक होने के सवाल पर विदेश सचिव का मानना था कि जो पारदर्शी होगा तो उसमें लीक क्या हो सकता है।

बुधवार, 22 दिसंबर 2010

आखिर कब तक आंसू बहायेगी प्याज?

प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप से 30 प्रतिशत दाम गिरे
दो-तीन सप्ताह तक दाम बढ़े रहेंगे: कृषि मंत्री
 दस दिन में गिर जाएंगे प्याज के दाम: कृषि सचिव
मार्च से पहले सामान्य नहीं होंगी प्याज की दरें: विशेषज्ञ
ओ.पी. पाल
 जब कांग्रेस का महाधिवेशन अंतिम चरणों में था तो देश में प्याज के दामों में अचानक हुई वृद्धि ने कांग्रेसनीत यूपीए सरकार के सामने मुश्किलें खड़ी कर दी, हालांकि प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप के बाद 24 घंटे के भीतर ही प्याज की सातवें आसमान पर पहुंची कीमतों में 30 प्रतिशत की कमी भी आ गई। देश की जनता के लिए प्याज के दामों पर कृषि मंत्री पवार ने उसी तरह का बयान दिया जिस प्रकार पिछले साल संसद सत्र के दौरान चीनी के दामों में हुई वृद्धि को लेकर दिये थे। मसलन यह कि प्याज की कीमतों में गिरावट को लेकर केंद्र सरकार कुछ कह रही तो कृषि मंत्री ऐसा बयान देने में फिर पीछे नहीं रहे जिससे सरकार की मुश्किलें कम होने वाली नहीं है। भ्रष्टाचार के खिलाफ राजग की रैली में जहां घोटालों और भ्रष्टाचार के मुद्दे छाए रहे वहीं प्याज की कीमत बेतहाशा वृद्धि पर भी राजग ने यूपीए सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। राजग की रैली और कांग्रेस के 83वें महाधिवेशन के बीच प्याज की कीमतों से आम जनता के ऐसे आंसू बहाये कि इसमें सीधे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को दखल देना पड़ा और प्रधानमंत्री ने कृषि मंत्री शरद पवार से पूछा कि आखिर हफ्ते भर में प्याज के दाम इतने कैसे बढ़ गए। इसका नतीजा यह हुआ कि सरकार के दखल के बाद प्याज के निर्यात पर तत्काल पर तुरंत रोक लगाई गई और प्रधानमंत्री ने देश को भरोसा दिलाया कि दाम कम करने के लिए तमाम उपाय किए जाएंगे। कृषि मंत्री शरद पवार ने उसी तरह के बयानों की झड़ी लगा दी जिस प्रकार पिछले साल संसद के सत्र के दौरान चीनी के दामों में हुई बेतहाहशा वृद्धि के दौरान देकर सरकार के सामने संकट पैदा कर दिये थे। शरद पवार ने मंगलवार को कहा था कि प्याज की कीमतें अगले 2-3 सप्ताह ज्यादा ही रहेगी और उसी के बाद स्थिति सामान्य हो सकेगी। जबकि उनके इस बयान के विपरीत प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप से 24 घंटे के भीतर 30 फीसदी दाम कम हो सके। पवार तो यहां तक भी कह गये कि सरकार मांग पूरी करने के लिए प्याज का आयात नहीं करेगी, लेकिन सूत्रों के अनुसार सरकार द्वारा 450 टन प्याज पाकिस्तान से मंगवाया गया है। प्याज की दरें बढ़ने पर प्रधानमंत्री ने संबन्धित मंत्रियों को पत्र लिखकर कहा है कि प्याज की बढी कीमतों को कम करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाये जाएं ताकि प्याज की कीमतों को सामान्य स्तर पर लाया जाए। कृषि मंत्री शरद पवार के बयान के उलट कृषि सचिव पीके बसु ने कहा कि नई फसल आने के बाद प्याज की कीमत अगले 7 से 10 दिन में कम हो जाएंगी। प्याज के दामों में भले ही निर्यात पर रोक के बाद करीब 30 फीसदी की गिरावट आई हो, लेकिन अब भी देश की ज्यादातर मंडियों में प्याज 40 से 50 रुपये किलो बिक रही है। लेकिन अब भी यह दाम आम आदमी की पहुंच से प्याज को दूर किए हुए हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि प्याज का यह संकट अगले दो-तीन हफ्ते नहीं बल्कि मार्च तक जारी रहेगा। मार्च में रबी की फसल के बाजार में आ जाने के बाद ही यह संकट दूर होगा। सरकार ने प्याज की कीमतों को नीचे लाने के लिए कोशिशें तेज कर दी हैं। हालांकि वित्त मंत्रालय ने प्याज के आयात पर ड्यूटी में पांच फीसदी की कमी का ऐलान कर दिया है। इससे पहले सरकार ने प्याज के निर्यात पर रोक लगा दी थी।

संसद में अब वो सांसद नहीं जो....

इतिहास में पहली बार विशुद्ध रूप में दिखे
ओ.पी. पाल
संसद में अब जमीन से जुड़े सांसदों की कमी ही शायद नागरिक सुधारों व बेहतर सेवाओं को सशक्त बनाने के बजाय कमजोर हो रही है, जहां जन प्रतिनिधियों के रूप में उद्योगपति, व्यपारी, कारोबारी या फिर बिल्डर्स ही संसद में पहुंच रहे हैं जिसके कारण उनके हितों में टकराव की संभावनाओं को कम नहीं आंका जा सकता। इस प्रकार का खुलासा नेशनल सोशल वॉच नामक संस्था ने शासन तथा विकास 2010 पर जारी अपनी सिटीजन रिपोर्ट में किया है। नागरिकों को सुधारों के माध्यम से बेहतर सेवाओं की मांग करने के लिए और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से समाज के वॉचडॉग का काम करने वाली इस संस्था ने रिपोर्ट में शासन के मुख्य चार संस्थानों संसद, न्यायपालिका, कार्यकारी एवं स्थानीय सरकार का मूल्यांकन किया है। संसद के हाल ही में संपन्न हुए शीतकालीन सत्र के दौरान भारत की संसद के इतिहास में पहली सांसदों को विषुद्ध रूप से उनके कामकाज एवं प्रदर्शन के आधार देखा गया है। नेशनल सोशल वॉच के राष्ट्रीय संयोजक अमिताभ बेहर कहते हैं कि इस जारी रिपोर्ट से सांसदों को भविष्य में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरणा प्रोत्साहन मिलना चाहिए। इस जारी रिपोर्ट सांसदों के कामकाज करने की क्षमता में भी कमी आई है, जिसका कारण है कि लोकसभा में कुल सांसदों में से 25 प्रतिशत सांसद या तो उद्योगपति हैं या फिर व्यापारी, कारोबाबरी या बिल्डर्स हैं जिनके कारण उनके हितों में टकराव की संभावना कम करके नहीं आंकी जा सकती। स्थाई समितियों की सदस्यता में भी हतों में टकराव बढ़ा है यानि समितियों की प्रणालियों के कार्यकाल, स्थाई तथा वित्तीय समितियों में सदस्यों की संख्या को कम कर 20 तक लाने के लिए कड़ाई से युक्तिकरण की बेहद आवश्यकता है। इसी कारण वित्तीय संकट, मूल्य वृद्धि तथ मौसम में आ रहे बदलावों जैसे प्रमुख मामलों में राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मुख्य नीतियों के क्रियानवयन में नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। संसद में जमीन से जुडे प्रतिनिधियों की हो रही कमी का ही कारण है कि संसद में होने वाली चर्चाओं के दौरान विभिन्न विषयों पर सांसदों में विशेषज्ञता का न होना भी एक बड़ी खामी बनी हुई है। वहीं संसद सत्र के दौरान सांसदों की उपस्थिति पर भी सवाल उठाये गये हैं। जहां तक प्रश्नकाल का सवाल है उसके लिए रिपोर्ट में एक घटना का जिक्र किया गया जब लोकसभा में वर्ष 2009 के शीतकालीन सत्र का 30 नवंबर का वह दिन बेहद चौंकाने वाला था जब लोकसभा में जिन 28 सांसदों के तारांकित सवाल सूचीबद्ध थे तो उनमें से एक भी सांसद सदन में उपस्थित नहीं था। भारतीय संसद के इतिहास मे यह पहला मौका था, जब प्रश्नकाल पूरी तरह से धाराशायी हुआ। तभी तो लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार और राज्यसभा के सभापति मोहम्मद हामिद अंसारी ने प्रश्नकाल को अत्यंत महत्वपूर्ण करार देते हुए कड़े कदम उठाते हुए नियमों में बदलाव किये ताकि प्रश्नकाल धाराशायी न हों। लेकिन इस इतिहास की हाल ही में संपन्न हुए शीतकालीन सत्र ने पूरे सत्र में प्रश्नकाल ही नहीं सभी कामकाज को धाराशायी करने का काम किया है। इस रिपोर्ट में सर्वश्रेष्ठ कार्य करने वाले सांसदों का भी खुलासा किया है जिसमें चौदवीं लोकसभा में सर्वश्रेष्ठ कार्य करने वालों की सूची में शामिल सांसद पन्द्रहवीं लोकसभा में जगह ही नहीं बना पाए। इसका कारण यही बताया गया कि दोनों सदनों में धनाढ्य सांसदों की संख्या ज्यादा बढ़ती जा रही है।

बैडमिंटन को चाहिए विदेशी कोच

 ओ.पी. पाल
देश की प्रसिद्ध बैडमिंटन खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली चैंपियनशिप खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए मददगार रहे हैं, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय स्तर के के लिए बेहतर प्रशिक्षण के लिए भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों की मदद को बढ़ाने की जरूरत है।हरियाणा बैडमिंटन एसोसिएशन के कार्यक्रम से इतर बैडमिंटन खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा ने यहां कहा कि पिछले तीन-चार सालों से भारत में बैडमिंटन का अच्छा प्रदर्शन देखने को मिला है। इसमें कुछ खिलाड़ियों ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते हैं जिसके नए उदाहरण राष्ट्रमंडल खेलें अ‍ैर एशियन बैडमिंटन चैंपियनशिप में सायना नेहवाल के रूप में सामन हैं। गुट्टा का कहना था कि भारत में बैडमिंटन प्रतिभाओं की कमी नहीं है, बल्कि उन्हें खोजने के प्रयास तेज करके प्रायोजकों को उनकी मदद के लिए आगे आने की जरूरत है। उन्होंने क्रिकेट की तरह बैडमिंटन को स्कूल, जिला व राज्य स्तर पर प्रोत्साहन देने के लिए कोच उपलब्ध कराए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि घरेलू स्तर पर अधिक से अधिक बैडमिंटन टूर्नामेंट कराने के लिए भी प्रायोजकों को हर स्तर पर मदद देने के लिए तत्पर रहना जरूरी है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर के लिए बैडमिंटन खिलाड़ियों के लिए ज्वाला गुट्टा न विदेशी कोच की भी वकालत की और कहा कि जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तरों पर नियमित रूप से टूनार्मेंटों का आयोजन भी बैडमिंटन के नए खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय दर्जे पर लाने के लिए मददगार साबित होगा। अपने व्यक्तिगत प्रदर्शन के बारे में पूछे जाने पर ज्वाला गुट्टा ने कहा कि उसकी विश्वस्तर पर गिरती रैंकिंग का कारण उसका खराब प्रदर्शन बेमाने है, जबकि हकीकत यह है कि कई बैडमिंटन टूर्नामेंटों में हिस्सा न लेने के कारण रैंकिंग नीचे आई है। भारत की स्टार युगल खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा ने कहा कि उसने अश्विनी पोनप्पा के साथ मिलकर राष्ट्रमंडल खेलों की महिला युगल स्पर्धा का स्वर्ण जीता था। ज्वाला ने कहा कि वह राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों की तैयारी के लिए उससे पहले काफी टूनार्मेंटों में नहीं खेल सकी और उसके बाद भी किन्हीं कारणवश उसने विश्राम लिया है जिसके कारण रैंकिंग गिरी है। लेकिन ज्वाला कहती हैँ कि लगभग एक महीने के विश्राम के बाद वह अब अपने आपको तरोताजा महसूस कर रही हैं और वह अब शीघ्र ही ओलंपिक की तैयारियों के लिए अभ्यास करने में व्यवस्त हो जाएगीं। ज्वाला मिश्रित युगल में वी. दीजू को अपना सबसे बेहतर जोड़ीदार मानती हैं और वह अश्विनी पनप्पा के साथ भी मिश्रित युगल मैच खेलना पसंद करेंगी। गौरतलब है कि ज्वाला ने अश्विनी पोनप्पा के साथ मिलकर राष्ट्रमंडल खेलों की महिला युगल स्पर्धा का स्वर्ण जीता था लेकिन इस दोनों की इस स्पर्धा में विश्व रैंकिंग 30 तक गिर गई है जबकि इसी साल यह जोड़ी छठे नंबर पर भी काबिज थी। दूसरी तरफ वी. दीजू के साथ मिश्रित युगल में भी वह 40वें पायदान पर खिसक गई है। वी. दीजू के साथ इस साल वह छठे नंबर पर थी।

आक्रमण को बनाया बचाव का हथियार

कांग्रेस महाधिवेशन में छाया रहा भ्रष्टाचार का मुद्दा
ओ.पी. पाल
प्रसिद्ध कहावत है कि आक्रमण ही बचाव का सर्वश्रेष्ठ उपाय है। भ्रष्टाचार से कई तरह के आरोपों से घिरी कांग्रेस ने अब शायद इस कहावत को ही अपना मूलमंत्र बना लिया है। इस कड़ी में कांग्रेस महधिवेशन में रविवार को शुरू हुए विपक्ष पर हमले सोमवार को भी जारी रहे। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, महासचिव राहुल गांधी या फिर प्रधानमंत्री मनमोहन ही क्यों न रहे हों सभी ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर विपक्ष पर हमले करके आक्रमक तेवरों में पलटवार किया। सोनिया गांधी ने तो कांग्रेसजनों का यहां तक आव्हान किया कि वे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से आक्रामकता के साथ निपटते हुए उनके दोहरें मापदंड को जनता के सामने बेनकाब करने का काम करें।सवा सौ साल की राजनीतिक पार्टी कांग्रेस का बंदेमातरम् से शुरू हुआ तीन दिवसीय 83वां महाधिवेश राष्टÑगान के साथ ही सोमवार को सम्पन्न हो गया है। यह अधिवेशन ऐसे समय हुआ जब भ्रष्टाचार और घोटाले के मुद्दे पर कांग्रेस विपक्षी दलों से चौतरफा घिरी हुई है, जिसके लिए यह अधिवेशन चुनौतियों से कम तो नहीं था, लेकिन इस महाधिवेशन में कांग्रेस ने भ्रष्टाचार के आरोपों के चक्रव्यूह से बाहर निकलने का रास्ता ही नहीं खोजा, बल्कि वह प्रसिद्ध कहावत ‘आक्रमण ही बचाव का सर्वश्रेष्ठ उपाय है’ चरितार्थ होती नजर आई जिसे कांग्रेस ने अपना मूलमंत्र भी बनाया है। भ्रष्टाचार को देश व समाज के विकास में बाधक बताते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जहां भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग का ऐलान किया, वहीं विपक्षी दलों खासकर भाजपा पर इस मुद्दे को लेकर हमले भी बोले। कांग्रेस के पिछले दो दिनों में महाधिवेशन के मंच से सोनिया ने ही नहीं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी, गृहमंत्री पी. चिदंबरम, वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के अलावा अन्य केई मंत्रियों व कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेसनीत यूपीए सरकार की उपलब्धियों का बखान करते हुए भ्रष्टाचार पर विपक्ष पर हमले किये। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने तो कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को हिदायत भी दी कि वे ऐसे अधिकारों (भूमि आवंटन के विवेकाधीन अधिकार) की समीक्षा करके उनका जल्दी से जल्दी निपटान करके एक मिसाल कायम करें। सोनिया गांधी महाधिवेशन में भ्रष्टाचार पर विपक्ष पर हमला बोलने में रविवार की अपेक्षा सोमवार को अधिक आक्रामक तेवरों में नजर आई, जिन्होंने देशभर से आए कांग्रेसजनों का आव्हान करते हुए कहा कि वे विरोधी दलों के बेबुनियाद आरोपों के खिलाफ जनता के बीच जाकर प्रचार करें और भ्रष्टाचार पर दोहरे मापदंड अपना रही भाजपा को बेनकाब करें। महाधिवेशन में वैसे तो मुद्दे अनेक थे, लेकिन भ्रष्टाचार का मुद्दा ही ऐसा था, जिससे कांग्रेस भयभीत थी और इसी चक्रव्यूह से निकलने के लिए कांग्रेस ने आक्रामकता की नीति से विपक्ष का मुकाबला करने की नीतियों का ऐलान किया। इस आक्रामकता के मूलमंत्र को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जहां चिंतन शिविर आयोजित करने की घोषणा की तो वहीं सरकार की उपलब्धियों और प्रमुख विपक्षी दल भाजपा के दोहरे मापदंड को बेनकाब करने के लिए जन जागरण अभियान चलाने का भी ऐलान ही नहीं किया, बल्कि सोनिया ने भ्रष्टाचार के मुद्दे से ही आमने-सामने आकर मुकाबला करने की बात कही।कांग्रेसनीत यूपीए सरकार के दूसरे शासनकाल में जिस प्रकार से वह भ्रष्टाचार और घोटालों के मुद्दे पर घिरी रही है उसमें 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले ने कांग्रेस की राजनीतिक तौर पर ज्यादा फजीहत हुई है, जिसके कारण संसद का समूचा शीतकालीन सत्र का सत्रावासन लगभग बिना किसी कामकाज के ही कराना पड़ा। इसी मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने भी कांग्रेस का बचाव करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और 2जी स्पेक्ट्रम आंवटन के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि कांग्रेस ने महाधिवेशन में आक्रामक तेवरों में आईपीएल में शशि थरूर, आदर्श हाउसिंग सोसायटी में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण और राष्ट्रमंडल खेलों में अनियमितताओं में सुरेश कलमाडी की तरह 2जी स्पेक्ट्रम में संचार मंत्री ए. राजा को हटाने की दुहाई देते हुए कर्नाटक में जमीन घोटाले में भाजपा के दोहरे मापदंड अपनाने की नीति के साबित करने का भी प्रयास किया है। भ्रष्टाचार के मुद्दे से शुरू हुआ कांग्रेस का महाधिवेशन भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग के ऐलान के साथ ही संपन्न हो गया है।

मंत्रियों को फटकार तो नेताओं को नसीहत

तो..अब कांग्रेस कारपोरेट शैली में करेगी काम तो
ओ.पी. पाल
कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया ने केंद्र सरकार के मंत्रियों को फटकार लगाते हुए संगठन के बड़े पदों पर बैठे वरिष्ठ  नेताओं को भी नसीहत दी। उन्होंने आम कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संगठन की शक्ति और कान बताते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि कार्यकर्ता के समक्ष कांग्रेसनीत केंद्र सरकार के मंत्रियों और पार्टी के नेताओं को अपनी ईमानदारी और जवाबदेही के प्रति किसी किस्म के संदेह की गुंजाइश नहीं छोड़नी चाहिए। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित कांग्रेस के 83वें महाधिवेशन में उद्घाटन भाषण के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने कहा कि देश के छोटे स्थान पर बैठा कांग्रेस कार्यकर्ता संगठन की कान व आंख यानि ताकत है जिसे नजर अंदाज करने की शिकायतें आ रही हैं। उन्होंने अपने संगठन को अपने अंदर कमियों के देखने की बात करते हुए स्पष्ट किया कि केंद्रीय मंत्री जब भी कहीं अपना दौरा करें तो वहां की कांग्रेस इकाई से भी मिलें और आम कार्यकर्ता की बात सुने। उन्होंने कहा कि हमें अपनी कमजोरियों पर भी ध्यान देना होगा। पार्टी भले ही गौरवशाली अतीत की समृद्ध विरासत से पूर्ण है लेकिन भविश्य की चुनौतियों का सामना तभी किया जा सकेगा जब हम समय के साथ अपने कामकाज की शैली में भी बदलाव लाएं। वहीं उन्होंने संगठन में ऊंचे औधे पर बैठे नेताओं को भी साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस अब कारपोरेट शैली में काम करेगी, क्योंकि बिहार चुनाव नतीजा इस तरह का सबक दे चुकें हैं। उन्होंने कांग्रेस नेताओं को सादगी और मितव्ययता के रास्ते पर जाने का संकेत देते हुए कहा कि पार्टी नेताओं को अपनी ईमानदारी और जवाबदेही के प्रति किसी किस्म के संदेह की गुंजाइश नहीं छोड़नी चाहिए, क्योंकि आम कार्यकर्ता की उपेक्षा अब बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने इसके लिए जल्द ही एक चिंतन शिविर का आयोजन करने की भी घोषणा की, जिसमें संगठन के कामकाज में बदलाव करके इसे कारपोरेट की शैली में काम करने लायक बनाने से जुडे तमाम अहम फैसले लिए जाएंगे। साथ ही उन्होंने संगठन को और ज्यादा युवा बनाने का भी संकल्प दोहराया, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि जल्द ही पार्टी संगठन में राहुल गांधी की भूमिका और बढेगी। उन्होंने कहा कि हम एक विरासत के उत्तराधिकारी हैं। यह विरासत संवेदनाओं की विरासत है। इसलिए हमारे लिए जरूरी है कि हम आत्मचिंतन करें। यही इस महाअधिवेशन का उद्देश्य है। हम सिर्फ अपने अतीत का उत्सव मनाने के लिए नहीं जुटे हैं। श्रीमति गांधी ने नेहरू, इंदिरा और राजीव गांधी को याद करते हुए कहा कि हमें उनकी विरासत को आगे बढ़ाना है।
राहुल की संगठन में बढेगी भूमिका
पार्टी में जल्द ही राहुल गांधी को आगे लाने का संकेत देते हुए सोनिया ने कहा कि उम्र और अनुभव के अलावा संगठन को युवा शक्ति और जीवन्तता की जरूरत है, इसीलिए हम ज्यादा से ज्यादा युवाओं के प्रवेश का स्वागत करते हैं। राहुल गांधी के नेतृत्व में युवक कांग्रेस और छात्र संगठन एनएसयूआई द्वारा किए गए सदस्यता अभियान की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि इसके सकारात्मक परिणा दिख रहे हैं। बिहार के विधानसभा चुनाव परिणामों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी की अब जमीनी स्तर पर नए सिरे से खडा करने के अलावा हमारे पास दूसरा कोई रास्ता नहीं है। आगे का मार्ग लंबा और कठिन है लेकिन दृढ रहेंगे और सफल होंगे।
चुनावी मशीन न बने कांग्रेस
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को आगाह किया कि देश की इस सबसे पुरानी और बड़ी पार्टी को एक विशाल चुनावी मशीन से कुछ ज्यादा बनने की जरूरत है अ‍ैर पार्टी को जमीनी स्तर पर नये सिरे से स्थापित करने के अलावा हमारे पास न तो कोई विकल्प है और न ही कोई शार्टकट। सोनिया ने बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी की शर्मनाक हार के संदर्भ में कहा कि उन्हें अच्छी तरह मालूम है कि कुछ प्रदेशों में बहुत ज्यादा काम करने की जरूरत है। हाल ही में बिहार के चुनावों ने यह अच्छी तरह साफ कर दिया है कि पार्टी को जमीनी स्तर से नये सिरे से बनाने के अलावा हमारे पास और कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि आगे रास्ता लंबा और बहुत मुश्किल है लेकिन पार्टी को जमीनी स्तर से नये सिरे से बनाने के अलावा और कौई आसान रास्ता नहीं है।
संयम व निष्ठा की प्रतिमूति मनमोहन
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि राष्ट्र की समृद्धि के प्रति प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अचल समर्पण की वजह से पार्टी उनके साथ मजबूती से खड़ी है। सोनिया ने कहा कि मनमोहन सिंह ने राष्ट्र की प्रगति और समृद्धि के प्रति दृढ़ समर्पण दशार्या है। पार्टी उनके साथ मजबूती से खड़ी है। प्रधानमंत्री की प्रशंसा करते हुए सोनिया ने कहा कि वह 'संयमऔर निष्ठा' की प्रतिमूर्ति हैं।

मंगलवार, 21 दिसंबर 2010

कांग्रेस अध्यक्ष का कार्यकाल पांच साल

कांग्रेस संगठन में नये अध्याय की शुरूआत
ओ.पी. पाल
कांग्रेस के 125वें वर्ष के समापन में कांग्रेस संगठन ने नये अध्याय की शुरूआत की है, जिसके लिए कांग्रेस महाधिवेशन में पार्टी संविधान संशोधन को पारित किया गया। कांग्रेस की विषय समिति की बैठक में शनिवार को ही संविधान संशोधन समिति की सिफारिशों पर कांग्रेस संविधान में संशोधन के प्रस्ताव को भी अंतिम रूप दे दिया गया था, जिसमें मुख्य रूप से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष समेत राष्ट्रीय कार्यसमिति का कार्यकाल तीन साल के बजाए पांच साल करने का प्रस्ताव था। इसी उद्देश्य से पार्टी ने 125वें वर्ष के समापन के समय महाधिवेशन में इस प्रस्ताव को पारित कराने का निर्णय लिया। खुले महाधिवेशन में देशभर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं के समक्ष पार्टी संविधान संशोधन का प्रस्ताव प्रभारी महासचिव आस्कर फर्नांडीस ने पेश किया, जिसे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी, रक्षा मंत्री एके एंटनी और पार्टी महासचिव राहुल गांधी, पार्टी के वरिष्ठ मंत्रियों और महाधिवेशन में तालियों की गड़गडाहट के बीच तालियों की गडगडाहट के बीच मंजूरी दी गई। इसी प्रस्ताव के पारित होते ही 125 साल के कांग्रेस संगठन में एक नया अध्याय जुड़ गया, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष का कायर्काल तीन साल से बढ़ाकर पांच साल हो गया है। यह संशोधन ऐसे समय में आया है, जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी लगातार चौथी बार पार्टी की कमान संभाल रही हैं। यह सवा सौ साल पुरानी इस पार्टी के अध्यक्ष का सबसे लंबा कायर्काल है। हर पांच साल में एक बार सांगठनिक चुनाव कराने के उद्देश्य से भी पार्टी ने संविधान में संशोधन किया। फिलहाल ये तीन साल पर कराये जाते हैं। इसी प्रस्ताव में एक अन्य महत्वपूर्ण संविधान संशोधन अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की साल में कम से कम एक बार बैठक से जुड़ा हुआ पारित किया है। इससे पहले पार्टी संविधान में व्यवस्था थी कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी को हर साल कम से कम दो बार बैठक करनी चाहिए। 

भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग का ऐलान

ओ.पी. पाल
कांगे्रस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने भ्रष्टाचार को देश के विकास में सबसे बड़ी बाधा करार देत हुए कहा कि भ्रष्टाचार के लिए जंग शुरू करनी चाहिए जिसमें पार्टी ने कांग्रेस शासित राज्यों के सभी मुख्यमंत्रियों से ऐसे अधिकारों (भूमि आवंटन के विवेकाधीन अधिकार) की समीक्षा कर और उन्हें त्याग कर मिसाल कायम करने को कहा है।पार्टी के महाधिवेशन के मंच से बोलते हुए सोनिया गांधी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग का ऐलान करते हुए कहा कि उनका मानना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग ऐसे शुरू की जाए, जिसके लिए एक ऐसी नयी व्यवस्था बनायी जाए, जिसमें राजनीतिज्ञों सहित सरकारी मुलाजिमों के भ्रष्टाचार के मामलों को फास्ट ट्रैक के आधार पर लिया जाए। भ्रष्टाचार से निपटने के लिये एक तंत्र बनाने पर बल देते हुए सोनिया ने कहा कि हम ऐसा तंत्र क्यों नहीं बना सकते, जो भ्रष्टाचार के मामलों को तय समयसीमा के भीतर निपटा सके। इस तरह के मामले लंबा खिंचने से लोगों का विश्वास टूटता है। इस तंत्र से दोषियों को तुरंत दंडित किया जा सकेगा और उन लोगों को दोषमुक्त किया जा सकेगा, जिन पर अनुचित आरोप लगाये गये हैं। दूसरे सुझाव में उन्होंने एक कानून के जरिए ऐसी सहज प्रक्रिया बनाने की बात कही, जिसमें सार्वजनिक खरीद और ठेकों में पूर्ण पारदर्शिता बरती जा सके। यह प्रशासन की जिम्मेदारी होनी चाहिए कि वह इस प्रक्रिया के कार्यान्वयन में किसी तरह की ढिलाई न आने दे और कोर्ई गड़बड़ी हच्ने पर मामले की सूचना देने वाले को पूर्ण सुरक्षा दे। भ्रष्टाचार से निपटने के अपने तीसरे सुझाव में कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इस बात के बहुत से सबूत हैं कि सभी तरह के विशेषाधिकारों से खास तौर पर भूमि आवंटन के मामलों में भ्रष्टाचार पनपता है। वह कांग्रेस शासित सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केन्द्र तथा राज्यों के अपने मंत्रियों से कहा कि वे इन विशेषाधिकारों को त्याग कर एक उदाहरण पेश करें। अपने चौथे सुझाव में सोनिया ने कहा कि हमें प्राकृतिक संसाधनों के दोहन में एक खुली और प्रतिस्पर्धात्मक व्यवस्था बनाने की जरूरत है। उन्होंने 2009 के चुनाव के अपने घोषणापत्र का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने ऐसा वायदा किया था और अब इसकी आवश्यकता और बढ़ गयी है। इस संदर्भ में सोनिया ने महत्वपूर्ण पदों पर बैठे कांग्रेसजनों से कहा कि वे अपनी ईमानदारी और शुचिता पर किसी तरह का संदेह पैदा नहीं होने दें। उन्होंने कहा कि जो पार्टी गरीबों का प्रतिनिधि होने का दावा करे, उसके लोगों के लालच और विलासिता में जीना- इन दोनों बातों में कोई मेल नहीं है।

शनिवार, 18 दिसंबर 2010

संविधान संशोधन से कांग्रेस में जुड़ेगा नया

महाधिवेशन में आएंगे संविधान संशोधन, राजनीति, विदेश नीति व आर्थिक प्रस्ताव
कांग्रेस के समर्पण व सेवा के 125 साल की गाथा का होगा गुणगान
ओ.पी. पाल
अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का 83वां महाधिवेशन पार्टी की विषय समिति की बैठक के साथ शुरू हो गया है, जिसमें खुले महाधिवेशन में आने वाले कांग्रेस के समपर्ण एवं सेवा के 125 साल, राजनीति, अंतर्राष्ट्रीय मामलों  के प्रस्तावों के अलावा पार्टी संविधान संशोधन को भी प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता वाली विषय समिति ने अंतिम रूप दे दिया है।राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली आयोजित कांग्रेस के 83वें महाधिवेशन की शुरूआत शनिवार को संसदीय सौंध के मुख्य सभागार में विषय समिति की बैठक के साथ हुई, जिसमें देश के राजनीतिक हालातों खासकर 125 साल की कांग्रेस पार्टी को मजबूत बनाने की रणनीति पर विचार किया गया, जिसमें युवाओं और महिलाओं, अल्पसंख्यकों तथा अन्य कमजोर वर्गो के हितों में नीतियों पर विचार किया गया। कांग्रेस के 19 व 20 दिसंबर को बाहरी दिल्ली के बुराड़ी में आयोजित 83वें महाधिवेशन में पारित किये जाने वाले प्रस्तावों पर भी विषय समिति के सदस्यों ने माथापच्ची की, जिसमें कांग्रेस पार्टी को125वें साल में नया अध्याय जोड़ने की दिशा में पार्टी की संविधान संशोधन समिति की सिफारिश को मानते हुए विषय समिति ने उस संविधान संशोधन के प्रस्ताव को भी महाधिवेशन में लाने के लिए अंतिम रूप दिया, जिसमें राष्ट्रीय कार्यकारिणी का चुनाव तीन साल के बजाय पांच साल बाद किया जाए। सूत्रों के अनुसारन संविधान संशोधन में प्रस्ताव है कि लोकसभा और विधानसभा की तर्ज पर ही कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राष्ट्रीय कार्यकारिणी का चुनाव भी पांच साल पर किया जाना चाहिए, इसी लिहाज से कांग्रेस इस महाधिवेशन में संविधान संशोधन प्रस्ताव पारित कराएगी। महाधिवेशन में इसके अलावा चार अन्य महाधिवेशन में चार प्रस्ताव पास किए जाएंगे जिसमें राजनीतिक,  आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय मामलों के अलावा कांग्रेस के 125 वर्ष पूरे होने के संबंधित प्रस्ताव शामिल हैं। इन सभी प्रस्तावों को चर्चा के बाद प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता वाली 22 सदस्यीय विषय समिति ने अंतिम रूप दे दिया है। सूत्रों के अनुसार महाधिवेशन में 19 नवंबर को संविधान संशोधन, राजनीति और कांग्रेस के समर्पण और सेवा के 125 साल वाले प्रस्ताव पारित होंगे, जबकि अंतर्राष्ट्रीय मामलों वाले विदेश नीति तथा आर्थिक प्रस्ताव महाधिवेशन के अंतिम दिन 20 दिसंबर को पारित किया जाएगा। अंतिम दिन यदि कोई प्रस्ताव राज्यों से आये तो उन्हें भी महाधिवेशन में पारति कराये जाने का प्रस्ताव है। इन प्रस्तावों को वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता वाली समिति ने अंतिम रूप दे दिया है। विषय समिति द्वारा इन प्रस्तावों पर सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली संचालन समिति 19 नवंबर यानि रविवार को महाधिवेशन में मुहर लगाएगी जिसमें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अलावा अन्य वरिष्ठ नेता भी हिस्सा ले रहे हैं। हालांकि महाधिवेशन की विषयवस्तु 'कांग्रेस के सेवा एवं समर्पण के 125 वर्ष' रखा गया है। पार्टी ने कांग्रेस देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी के सवा सौ साल पूरे होने के उपलक्ष्य में इस 'तंबुओं के शहर' में पार्टी का महाधिवेशन आयोजित करके कांग्रेस के सफर को ऐतिहासिक बनाने का प्रयास किया है। कांग्रेस की स्थापना के सवा सौ साल के इतिहास में दिल्ली में शनिवार से उसका छठा महाधिवेशन शुरू हो गया। आजादी के बाद से राष्ट्रीय राजधानी में उसका यह छठा महाधिवेशन है। राष्ट्रीय राजधानी में 32 वर्ष के अंतराल के बाद कांग्रेस महाधिवेशन का आयोजन किया जा रहा है। जबकि सोनिया गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद यह पार्टी का तीसरा महाधिवेशन है। दिल्ली में 32 वर्ष के अंतरराल पर कांग्रेस महाधिवेशन हो रहा है, पिछला महाधिवेशन 1978 में हुआ था जिसकी अध्यक्षता इंदिरा गांधी ने की थी। महाधिवेशन के पहले दिन विषय समिति की बैठक में प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी, महासचिव राहुल गांधी के अलावा प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता वाली विषय समिति के 22 सदस्यों के साथ राज्यों के मुख्यमंत्री, विधानसभा में कांग्रेस विधानमंडल के नेता, प्रदेशाध्यक्ष, राज्यों के प्रभारी एवं राष्ट्रीय महासचिव, सचिवों ने प्रस्तावों पर चर्चा के रूप में करीब छह घंटे तक माथापच्ची की और महाधिवेशन के लिए प्रस्तावित चार प्रस्तावों के अलावा पार्टी संविधान संशोधन के प्रस्ताव को भी अंतिम रूप दिया गया।

महाधिवेशन तय करेगा कांग्रेस का भविष्य

सोनिया का भाषण ही होगा राजनीतिक प्रस्ताव
ओ.पी. पाल
125वीं वर्षगांठ पर 83वें महाधिवेशन ऐसे समय हो रहा है जब कांग्रेस के सामने चौतरफा चुनौतियां ही हैं। खासकर भ्रष्टाचार और घोटाले के मुद्दे पर फजीहत झेल रही कांग्रेस पार्टी महाधिवेशन के जरिए नई रणनीतियों के सहारे उबरने का प्रयास कर रही है। इसी मकसद से कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी अपने अध्यक्षीय भाषण में नई रणनीतियों की घोषणा करके भ्रष्टाचार और घोटालों के चक्रव्यूह से पार्टी को निकलने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं की आवाज को बुलंद करेंगी।राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हो रहे कांग्रेस के महाधिवेशन की शुरूआत उन चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीतियां बनाने से हुई जिसके कारण कांग्रेस विपक्षी दलों से चौतरफा घिरी हुई है। कांग्रेस के लिए जी का जंजाल बने भ्रष्टाचार और घोटाले से बाहर आने के लिए कांग्रेस की विषय समिति की शनिवार को संसदीय सौंध के सभागार में चली करीब छह घंटे की मैराथन बैठक में कांग्रेस दिग्गजों ने मंथन करने के बाद रविवार को कांग्रेस के खुले महाधिवेशन में रणनीतियों का खुलासा करने के लिए प्रस्तावों को अंतिम रूप देने में चर्चा की। यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का अध्यक्षीय भाषण ही राजनीतिक प्रस्ताव होगा, जिसमें निश्चित रूप से कांग्रेस 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के अलावा आदर्श सोसायटी और राष्ट्रमंडल खेलों में हुए भ्रष्टाचार को लेकर विपक्ष को सीधे निशाने पर रखेंगी। कांग्रेस के इस महाधिवेशन में आने वाले करीब 15 हजार कांग्रेस प्रतिनिधियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को तैयार की गई रणनीतियों को लेकर जनता के बीच जाने का आव्हान भी कांग्रेस अध्यक्ष करेंगी, ताकि आने वाले कुछ राज्यों के चुनाव में कांग्रेस की बिहार जैसी फजीहत न हो सके। कांग्रेस पार्टी शनिवार को आरंभ हुए महाधिवेशन का पहला दिन रणनीतियां बनाने में निकल गया है, लेकिन सोमवार को महाधिवेशन ही वह दिन होगा जिसमें चुनौतियों से बाहर आने पर पार्टी आम कार्यकर्ता का मत हासिल करेगी यानि प्रस्तावों को पारित कराकर कांग्रेस में जान फूंकने का प्रयास किया जाएगा। इसके अलावा राष्टÑीय राजधानी दिल्ली में हो रहे कांग्रेस के महाधिवेशन की शुरूआत उन चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीतियां बनाने से हुई जिसके कारण कांग्रेस विपक्षी दलों से चौतरफा घिरी हुई है। कांग्रेस के लिए जी का जंजाल बने भ्रष्टाचार और घोटाले से बाहर आने के लिए कांग्रेस की विषय समिति की श्निवार को संसदीय सौंध के सभागार में चली करीब छह घंटे की मैराथन बैठक में कांग्रेस दिग्गजों ने मंथन करने के बाद रविवार को कांग्रेस के खुले महाधिवेशन में रणनीतियों का खुलासा करने के लिए प्रस्तावों को अंतिम रूप देने में चर्चा की। यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का अध्यक्षीय भाषण ही राजनीतिक प्रस्ताव होगा, जिसमें निश्चित रूप से कांग्रेस 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के अलावा आदर्श सोसायटी और राष्टÑमंडल खेलों में हुए भ्रष्टाचार को लेकर विपक्ष को सीधे निशाने पर रखेंगी। कांग्रेस के इस महाधिवेशन में आने वाले करीब 15 हजार कांग्रेस प्रतिनिधियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को तैयार की गई रणनीतियों को लेकर जनता के बीच जाने का आव्हान भी कांग्रेस अध्यक्ष करेंगी, ताकि आने वाले कुछ राज्यों के चुनाव में कांग्रेस की बिहार जैसी फजीहत न हो सके। इस महाधिवेशन में पूरे देश से अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी के करीब 1250, राज्य कांग्रेस कमेटियों के दस हजार तथ 1507 कार्यकर्ताओं और आमंत्रित सदस्यों समेत करीब 15 हजार प्रतिनिधि हिस्सेदार बनेंगे।

तम्बुओं का शहर में सोनिया

सोनिया आज करेंगी ध्वजारोहण
ओ.पी. पाल
कांग्रेस के महाधिवेशन के लिए सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं, जहां तम्बुओं के अस्थायी शहर को निर्मित करके बुराड़ी के महाधिवेशन स्थल को कांग्रेस के झंडे के रंग में रंग दिया गया है।इस महाधिवेशन में 19 नवंबर को 10.10 बजे कांग्रेस की नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ध्वजारोहण करेंगी, जिसके बाद खुला महाधिवेशन शुरू हो जाएगा। नवनिर्वाचित अध्यक्ष सोनिया गांधी को पार्टी की पंरपरा के अनुसार बनाये गये 33 द्वार वाले पंडाल के विशाल मंच तक ले जाया जाएगा। महाधिवेशन की तैयारियां भी अभूतपूर्व बतायी जा रही है और इस पंडाल में 17 कांग्रेस प्रतिनिधियों के बैठने के लिए कुर्सियां लगाई गई हैं, जबकि आगे की दो लाइनों में करीब एक हजार से अधिक क्षमता में फैंसी कुर्सियों के अलावा डेढ़ सौ सौफे डाले गये हैँ। मंच के बाएं और मीडिया को स्थान दिया गया है। इस पंडाल में जहां मंच पर श्रीमती सोनिया गांधी, राजीव गांधी, लाल बहादुर शास्त्री, जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गांधी, सरदार पटेल, अब्दुल कलाम, सरोजनी नायडू, सुभाषचंद्र बोस, डा. अम्बेडकर तथा प्रधानमंत्री मनमोहन के चित्रों का हार्डिंग लगाया गया तो मंच के बाएं ओर कांगे्रस युवराज राहुल गांधी का सबसे पहले चित्र लगाया गया है, जिसके बाद इस ओर डा. अम्बेडकर, सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल, राजीव गांधी, लाल बहादुर शास्त्री व अब्दुल कलाम के चित्र लगाए गये हैं, तो मंच के दाएं ओर सबसे पहले इंदिरा गांधी और उसके बाद क्रम से जवाहर लाल नेहरू, मनमोहन सिंह, संस्थापक अध्यक्ष वीवी बनर्जी, सरोजनी नायडू तथा अंत में सरदार पटेल के बड़े चित्र लगाए गये हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का चित्र मंच के विपरीत सबसे पीछे लगाया गया है। वहीं मंच के दाएं ओर कांग्रेस के 125 साल के सफर को दर्शाते हुए 1985 से अब तक बने 59 कांग्रेस अध्यक्षों के सभी चित्र लगाए गये हैं।
नरसिंह राव फिर हुए नजर अंदाज
कांग्रेस पार्टी ने जिस प्रकार से पिछले साल दिसंबर में कांग्रेस के 125वें वर्ष की शुरूआत में आयोजित सम्मेलन में पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंह राव को कोई स्थान नहीं दिया था, उसी प्रकार कांग्रेस के 83वें महाधिवेशन में भी उन्हें नजरअंदाज किया गया है। महाधिवेशन में देश के सभी कांग्रेसी प्रधानमंत्री को मंच पर संयुक्त चित्र में ही नहीं, बल्कि विशाल पंडाल में लगाए गये अलग-अलग चित्रों में भी कहीं तक नरसिंह राव का चित्र नहीं लगाया गया है। जहां तक पंडाल में पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के चित्र को जगह दी गई है तो वह शायद कांगे्रस की मजबूरी थी, जहां सभी कांग्रेस अध्यक्षों के टेबलेट साइज चित्रों में उन्हें एक कोने में जगह मिली है। नरसिम्हा राव 1992 से 1996 तक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे हैं। गौरतलब है कि जब पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंह राव का निधन हुआ था तो उनके पार्थिव शरीर को कांग्रेस मुख्यालय लाने से भी परहेज किया गया था।
आजादी के बाद नहीं बना मुस्लिम
 अध्यक्ष कांग्रेस के 125 साल के इतिहास को पार्टी ने अपने 83वें महाधिवेशन में प्रमुख पृष्ठभूमि में शामिल किया है, जिसमें महाधिवेशन के मंच के दाएं ओर लगाए गये कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्षों को क्रमवार चित्रों के रूप में दर्शाया गया है, लेकिन देखने से साफ जाहिर होता है कि कांग्रेस ने देश की आजादी के बाद किसी भी मुस्लिम को राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में पदासीन नहीं किया, जबकि कांग्रेस की स्थापना से अभी तक कुल बने 59 राष्ट्रीय अध्यक्षों में आजादी से पहले आठ मुस्लिम राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं, जिनमें 1887 में बदरूद्दीन तैयबजी, 1896 में रहमतुल्ला,1913 में नवाब सैयद मोहम्मद बहादुर, 1918 में सैयद हसन इमाम, 1921 में हकीम अजमल खान, 1923 में मौलाना अब्दुल कलाम आजाद व मौलाना मो. जफर तथा 1927 में डा. एम.ए. अंसारी कांग्रेस के राष्टÑीय अध्यक्ष के रूप में अंतिम मुस्लिम चेहरा था।

शुक्रवार, 17 दिसंबर 2010

संविधान संशोधन प्रस्ताव आने की संभावना

कांग्रेस महाधिवेशन के पहले दिन प्रस्तावों को अंतिम रूप
ओ.पी. पाल
अखिल भारतीय कांग्रेस के शनिवार 18 दिसंबर से राष्ट्रीय राजधानी में शुरू हो रहे 83वें महाधिवेशन में कांग्रेस संविधान संशोधन का प्रस्ताव आने की भी संभावनाएं हैं। जबकि कांग्रेस के 125 वर्ष की समर्पण सेवा, राजनीतिक, आर्थिक और विदेश नीति पर प्रस्ताव पारित करने के लिए कांग्रेस पहले ही एजेंडा तय कर चुकी है। महाधिवेशन में पेश किये जाने वाले प्रस्तावों पर पार्टी की ड्राफ्ट कमेटी चर्चा के बाद उन्हें अंतिम रूप देगी, जिन्हें खुले महाधिवेशन में पारित किया जाएगा।कांग्रेस के समपर्ण और सेवा के 125 साल को बुराड़ी में आयोजित कांग्रेस के महाधिवेशन में मुख्य रूप से फोकस किया जा रहा है, जिसके लिए कांग्रेस की ड्राफ्ट कमेटी महाधिवेशन के पहले दिन संसदीय सौंध के सभागार में एक बैठक करके एक प्रस्ताव लाएगी, वहीं इस बैठक में  राजनीतिक, आर्थिक और विदेश नीति पर भी प्रस्ताव पर चर्चा होगी, चर्चा के बाद समिति महाधिवेशन में उन्हें पारित कराने के लिए अंतिम रूप भी देगी। इन प्रस्तावों के अलावा ऐसी भी संभावना व्यक्त की जा रही है कि कांग्रेस की संविधान समिति द्वारा कांग्रेस संविधान संशोधन के लिए की गई सिफारिश को देखते हुए ड्राफ्ट समिति पार्टी संविधान संशोधन के प्रस्ताव को भी अंतिम रूप देगी। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के महाधिवेशन में संविधान संशोधन का प्रस्ताव आने की प्रबल संभावनाएं हैं। कांग्रेस के राजनीतिक गलियारे में इसकी चर्चाएं है कि कांग्रेस संविधान की विसंगतियों और पुनरावृत्ति को दुरुस्त करने के लिए संभावना है कि इस प्रस्तावित संविधान संशोधन में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष समेत राष्ट्रीय कार्यकारिणी के चुनाव का कार्यकाल तीन साल के बजाए पांच साल किया जा सकता है। संसदीय सौंध में होने वाली कांग्रेस ड्राफ्ट समिति में राष्ट्रीय कार्यकारिणी के अलावा राज्यों के प्रभारी महासचिव के अलावा राज्यों के अध्यक्ष तथा राज्यों की विधानसभाओं में कांग्रेस विधायक दल के नेता शामिल होंगे। क्योंकि राष्ट्रीय कार्यसमिति इस समय भंग है और उसे संचालन समिति में परिवर्तित कर दिया गया था तो इसलिए कांग्रेस की संचालन समिति के सदस्य प्रस्ताव के मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए होने वाली इस बैठक में हिस्सा लेंगे। कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी द्वारा एआईसीसी महाधिवेशन के लिए नियुक्त की गई ड्राफ्ट समिति के रूप में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता में 22 सदस्य शामिल हैं, जिसमें रक्षा मंत्री एके एंटोनी, गृहमंत्री पी. चिदंबरम, वाणिज्यमंत्री आनंद शर्मा, शहरी विकास मंत्री एस. जयपाल रेड्डी, वन एवं पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश, कानून मंत्री वीरप्पा मोइली, ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे, कारपोरेट मंत्री सलमान खुर्शीद, प्रवासी मामलों के मंत्री वायलार रवि, ग्रामीण विकास मंत्री डा. सीपी जोशी के अलावा मुकुल वासनिक, अर्जुन सिंह, कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी, राहुल गांधी, मोहसिना किदवई, दिग्विजय सिंह, हेमानंद बिस्वास, कैप्टन अमरेन्द्र सिंह, सीके जाफर शरीफ, मणिशंकर अय्यर और लाथनवाला सदस्य के रूप में शामिल हैँ। सूत्रों के अनुसार आर्थिक प्रस्ताव का मसौदा प्रणव मुखर्जी, पी. चिदंबरम, दिग्विजय सिंह, वायलार रवि, जयराम रमेश, मलिकाअर्जुन खर्गे और नमोनारायण मीना ने तैयार किया है, तो विदेश नीति के प्रस्ताव को आनंद शर्मा, डा. करण सिंह, श्रीमती अंबिका सोनी, डा. सैफुद्दीन सोज तथा सलमान खुर्शीद तैयार कर चुके हैँ। राजनीतिक प्रस्ताव को एके एंटोनी, सुशील कुमार शिंदे, गुलाम नबी आजाद, गिरिजा व्यास, मुकुट मिथी तथा मधुसूदन मिस्त्री ने तैयार किया है, जिसे कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने राजनीतिक लाइन को निर्धारित किया है। जबकि पार्टी के 125 साल के प्रस्ताव को सभी ने मिलकर तैयार किया है जिसमें कांग्रेस के गौरवशाली इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम को शामिल किया गया है।

भ्रष्टाचार के चक्रव्यूह में फंसी कांग्रेस

महाधिवेशन में विपक्ष पर रहेगा निशाना
ओ.पी. पाल
भ्रष्टाचार और घोटालों के कारण विपक्षी दलों के चक्रव्यूह में फंसी कांग्रेस महाधिवेशन में आने वाले प्रस्तावों के जरिए बाहर आने का भरकस प्रयास करेगी, जिसमें यूपीए सरकार और कांग्रेस शासित राज्यों की सरकार की उपलब्धियों का बखान होगा और पार्टी कांग्रेस कार्यकर्ताओं से इन उपलब्धियों को जनता के बीच ले जाने का आव्हान भी करेगी।राष्ट्रीय राजधानी के बुराडी गांव में शनिवार यानि 18 दिसंबर से 20 दिसंबर तक होने वाले कांग्रेस के 83वें महाधिवेशन में भ्रष्टाचार और घोटाला मुख्य मुद्दा होगा। महाधिवेशन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी जो संसद के शीतकालीन सत्र में हंगामे के कारण भ्रष्टाचार व घोटालों पर विपक्ष के तर्को का जवाब नहीं दे सके उन्हें अपने दल के अधिवेशन में आने वाले देशभर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं को स्पष्टीकरण देने का मौका मिलेगा और कांग्रेस पार्टी राजनीतिक प्रस्ताव के जरिए विपक्ष खासकर मुख्य विपक्षी दल भाजपा को घेरने का प्रयास करेगी। भ्रष्टाचार और घोटालों पर कांग्रेस यह बताने का प्रयास करेगी कि भ्रष्टाचार व घोटालों की कांग्रेस ने किस स्तर पर जांच शुरू कराई है और उससे जुड़े केंद्रीय मंत्रियों तथा मुख्यमंत्री को पद से हटाया है। जबकि विपक्षी दल भाजपा ऐसा नहीं कर पा रहा है। महाधिवेशन में पारित होने वाले राजनीतिक प्रस्ताव में कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को फोकस करके कांग्रेस उन्हें राजनीति में आगे लाने का भी प्रयास करेगी। यही कारण है कि एजेंडे में शामिल न होते हुए भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से की जाने वाली मांग पर राहुल गांधी का संबोधन कराया जाएगा? तो वहीं दूसरी ओर यूपीए सरकार का नेतृत्व कर रही कांग्रेस पार्टी जहां यूपीए के दूसरे कार्यकाल में भ्रष्टाचार और घोटालों के कारण आ रही मुश्किलों पर मंथन करेगी, वहीं बिहार चुनाव के नतीजों का भी जिक्र करेगी और कांग्रेस के 125वें साल में कांग्रेस को एक नये अध्याय के साथ नये सिरे से शुरूआत करने का आव्हान भी करेगी, जिसमें पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के आगामी विधानसभाओं के चुनाव के लिए कांग्रेस की नीतियों को भी उजागर किया जाएगा। वहीं 2012 में यूपी के विधानसभा चुनाव को लेकर भी कांग्रेस रणनीति की घोषणा कर सकती है। इस महाधिवेशन में जगनमोहन रेड्डी के कांग्रेस से इस्तीफा देने से आंध्र प्रदेश में कांग्रेस के संकट पर भी मंथन होना तय है। सरकार यूपीए सरकार और कांग्रेस शासित राज्यों की उपलब्धियों का भी महाधिवेशन में बखान करेगी तो वहीं गैर कांग्रेसी राज्य सरकारों की खामियों को उजागर करने में पार्टी कोई चूक नहीं करेगी। इसी प्रकार आर्थिक प्रस्ताव में पार्टी वैश्विक मंदी का जिक्र करते हुए उस उपलब्धियों को प्रमुखता से बताने का प्रयास करेगी कि इस आर्थिक मंदी के बावजूद कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में कोई कसर नहीं छोडी और देश का आर्थिक विकास प्रगति पर है। वहीं विदेश नीति में कांग्रेस पार्टी इस महाधिवेशन में अमेरिकी राष्टÑपति बराक ओबामा, फ्रांस के राष्टपति ब्रूनी सरकोजी तथा चीन के प्रधानमंत्री वेन वेन जियाबाओ द्वारा भारत दौरे करके जिस प्रकार भारत को एक बढ़ती ताकत बताया है का जिक्र करके भी कांग्रेस द्वारा विपक्ष को निशाने पर रखने की संभावना है। वहीं कांग्रेस के 125 साल के इतिहास को गौरवशाली करार देकर उसकी उपलब्धियों तथा देश की सेवाओं का जिक्र होने की भी संभावना है। ऐसी भी संभावना जताई जा रही है कि महाधिवेशन में कांग्रेस को मजबूत बनाने के लिए अन्य राज्यों से भी आने वाले प्रस्ताव पर महाधिवेशन मुहर लगाएगा।

गुरुवार, 16 दिसंबर 2010

125वें साल को ऐतिहासिक बनाने में जुटी कांग्रेस

83वें महाधिवेशन की तैयारियां युद्ध स्तर पर
तिरंगे झंडो के रंग में रंगा बुराडी
ओ.पी. पाल 
अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी के 125 साल के सफर को पार्टी ऐतिहासिक रूप में देखना चाहती है, तभी कांग्रेस के 83वें महाधिवेशन स्थल को तम्बुओं वाले एक खूबसूरत और हरे-भरे शहर के रूप में तैयार करने के लिए युद्ध स्तर पर काम किया जा रहा है। कांग्रेस के कुछ दिग्गजों का मानना है कि जिस प्रकार से 83वें महाधिवेशन की तैयारियां की जा रही हैं शायद ही इससे पहले इतने भव्य रूप में अन्य ही कोई महाधिवेशन आयोजित किया गया हो।कांग्रेस का तीन दिवसीय 83वां महाधिवेशन 18 से 20 दिसंबर तक बाहरी दिल्ली के बुराड़ी स्थित निरंकारी संत समागम स्थल पर किया जा रहा है। कांग्रेस पार्टी के 125 साल को इस महाधिवेशन के जरिए ऐतिहासिक बनाने की कवायद कर रही है, इसी लिहाज से महाधिवेशन स्थल को एक भव्य शहर की तरह से सजाया जा रहा है, जो भारतीय कांग्रेस पार्टी के चरखे के चिन्ह वाले तिरंगे सेपाट दिया गया है, तो वहीं खूशबुदार फूलों एवं अन्य बागवानी भी कदम-कदम पर गमलों के साथ चौतरफा नजर आ रहे हैं। हरिभूमि संवाददाता ने बुराड़ी में कांग्रेस के महाधिवेशन के लिए की जा रही तैयारियों का जायजा लिया, जहां महाधिवेशन के लिए विशालकाय वाटर प्रूफ पंडाल को जिस तरह से सजाने और कांग्रेस प्रतिनिधियों के बैठने की व्यवस्था को अंजाम दिया जा रहा है उसकी कई विशेषताएं सामने आ रही हैं। पंडाल में विशाल मंच के सामने मंत्रियों, सांसदों के लिए तीन व्यक्तियों की क्षमता वाले डेढ़ सौ से कुछ ज्यादा सोफे डाले गये हैँ, जबकि मंच के एक और मीडिया तो दूसरी ओर देश के स्वतंत्रता सेनानी और अन्य वीआईपी लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है। मंच के सामने सोफो की कतार के बाद जालियां लगाकर कांग्रेस प्रतिनिधियों के बैठने के लिए करीब 17 हजार कुर्सियों की व्यवस्था की गई है। मंच पर महापुरूषों के चित्रों से पाटा जा रहा है, जिसमें सुभाषचंद्र बोस, पंडित जवाहर लाल नेहरू, महात्मा गांधी, डा. भीमराव अम्बेडकर, सरदार बल्लभ भाई पटेल, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, राजीव गांधी के अलावा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व श्रीमती सोनिया गांधी के चित्र भी शामिल हैं। इस पंडाल में मंच के दोनों ओर पीछे की ओर से दो द्वार बनाए गये हैं। तो दोनों साइड़ो में 11-11 द्वार हैं जहां से मीडिया, सांसद, विधायक तथा कांग्रेस प्रतिनिधियों को प्रवेश दिया जाएगा। इसी प्रकार से मंच के विपरीत पंडाल के अंत में भी नौ द्वार बनाए गये हैं। यानि महाधिवेशन के लिए 33 द्वार वाला पंडाल बनाया गया है। पंडाल में मंच के दोनों ओर विशाल स्क्रीन लगाई गई हैं तो उसके बाद दोनों ओर ही चार-चार उनसे आधी स्क्रीन लगाई गई हैं, ताकि सबसे पीछे बैठे प्रतिनिधि भी मंच पर बैठे अतिथियों को देख सकें। मंच के पीछे वीआईपी प्रतिनिधियों के लिए एक हॉल बनाया गया है, तो शेष तीन साइड़ो में हर द्वार से आवागमन के दौरान बाहरी लॉबी में डीएवीपी की प्रदर्शनी होगी, तो वहीं कांग्रेस के साहित्य और स्वतंत्रता संग्राम सें जुड़ी सामग्रियों को भी प्रदर्शित किया जा रहा है। हर द्वार पर सुरक्षा की दृष्टि से मेटल डिटेक्टर लगाए जा रहे हैँ। महाधिवेशन की तैयारियों के लिए कांग्रेस सेवादल की देखरेख में चल रहा है जिसमें दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी और दिल्ली सरकार का समूचा मंत्रिमंडल अपनी-अपनी व्यवस्थाओं को अंजाम दे रहें हैं। पंडाल के ही नहीं बल्कि महाधिवेशन स्थल को चौतरफा चरखे वाले तिरंगे से पाटा गया है, तो महाधिवेशन के हार्डिंग्स भी स्थल के चारों ओर नजर आ रहे हैं, जिनमें कांग्रेस के 125 साल की सेवा के साथ प्रधानमंत्री मनमोहन के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी और महासचिव राहुल गांधी को फोकस किया गया है। पंडाल के पहले द्वार के सामने ही राष्ट्रीय ध्वजरोहण स्थल की तैयारियां की जा रही हैं, जहां कांग्रेस सेवा दल की सलामी लेने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी झंडा फहराएंगी। कांग्रेस के दिल्ली प्रदेशाध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल का दावा है कि महाधिवेशन की तैयारियों के लिए रातभर कार्य चलेगा जिसे कल यानि 17 दिसंबर की दोपहर को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। वहीं प्रधानमंत्री सहित सरकार से जुड़े अनेक वरिष्ठ लोगों के वहां प्रवास करने को देखते हुए इसे अत्याधुनिक संचार उपकरणों से जोड़ा गया है जिससे कि सरकार का आवश्यक काम काज भी वहीं से चलता रहे।
तम्बूओं के शहर में महाधिवेशन
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सहित कुछ वरिष्ठ नेताओं के लिए अटेच बाथरूम वाले तंबुओं के विशेष कक्ष तैयार किए गए हैं तो वहीं महाधिवेशन स्थल पर मुख्य पंडाल के बाद दिल्ली कांग्रेस का कार्यालय और स्वागत कक्ष बनाया गया है तो वहीं भारतीय राष्टÑीय कांग्रेस का अखिल भारतीय कांग्रेस कार्यालय के साथ सभी राज्यों के कार्यालय बनाये गये हैं। रेलवे बुकिंग सेंटर, डाकघर, दस बैड वाला मिनी अस्पताल के अलावा दिल्ली से बाहर देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले कम से कम छह हजार कांग्रेस प्रतिनिधियों के ठहरने के लिए 500 से अधिक टैंट लगाए गये हैं, जिनमें महिला कार्यकतार्ओं के ठहरने के लिए विशेष प्रबंध किए गए है और उनके लिए अलग से टेंटों के ही 80 आवास क्षेत्र बनाए गए हैं। महिला प्रतिधिनियों के लिए अलग व्यवस्था करके सभी के लिए नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। वहीं सात विशालकाय पंडाल भोजन और नाश्ते के लिए तैयार किये जा चुके हैं जिनमें एक मीडिया के लिए होगा। वहीं मीडिया के लिए भी एक विशाल मीडिया सेंटर बनाया गया है। सुलभ इंटरनेशन के जरिए जनसुविधाओं की भी समुचित व्यवस्था की गई है तो मुखर्जीनगर पुलिस पोस्ट,अग्निशमन केंद्र के अलावा हेल्पलाइन सेंटर भी तैयार किया गया है। यानि यूं कहा जा सकता है कि कांग्रेस का महाधिवेशन एक तंबूओं के शहर में होगा।
दिल्ली में होगा छठा महाधिवेशन
कांग्रेस के 83वें महाधिवेशन का आयोजन दिल्ली में हो रहा है इससे पहले 1978 में राष्ट्रीय राजधानी में कांग्रेस का महाधिवेशन तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की अध्यक्षता में आयोजित किया गया था। आजादी के बाद 1951 में हुए कांग्रेस का पहले महाधिवेशन की मेजबानी भी दिल्ली के हिस्से में आई थी। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार कांग्रेस की स्थापना के बाद दिल्ली में पहले कांग्रेस महाधिवेशन का आयोजन 1918 में किया गया था जिसकी अध्यक्षता पंडित मदन मोहन मालवीय ने की थी। इसके बाद राष्ट्रीय राजधानी में 1923 में पार्टी ने महाधिवेश का आयोजन किया था जिसकी अध्यक्षता मौलाना अबुल कलाम आजाद ने की थी। साल 1932 में दिल्ली में आयोजित कांग्रेस महाधिवेशन की अध्यक्षता भी पंडित मदन मोहन मालवीय ने की थी। वर्ष 1998 में सोनिया के पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस का यह तीसरा पूर्ण सत्र होगा। कांग्रेस का पिछला पूर्ण अधिवेशन 2006 में हैदराबाद में आयोजित किया गया था।
स्वतंत्रता सेनानियों को मिलेगा अतिथि सत्कार
कांग्रेस पार्टी के महाधिवेशन में 125 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में देश को आजादी दिलाने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के अतिथि सत्कार के लिए पलक पावडे बिछाने की पूरी तैयारी कर रही है। 18 से 20 दिसंबर को राष्ट्रीय राजधानी में होने जा रहे कांग्रेस के महाधिवेशन में पार्टी हर राज्य से एक-एक स्वतंत्रता सेनानी को सम्मानित करेगी। वहीं उनके दिल्ली प्रवास के लिए अतिथि सत्कार के रूप में पार्टी ने विशेष व्यवस्था की है। महाधिवेशन के मंच से उन्हें सम्मानित करने के अलावा सभी स्वतंत्रता सेनानियों को कांग्रेस का 125 साल का इतिहास और साहित्य भी प्रदान किया जाएगा। महाधिवेशन में हिस्सा लेने वाले वीवीआईपी अतिथियों के लिए उनके ठहरने के स्थान से महाधिवेशन स्थल से लाने-ले जाने के लिए विशेष वाहनों की व्यवस्था की गई है। मीडिया के लिए भी कांग्रेस मुख्यालय से महाधिवेशन स्थल पर आने जाने के लिए कैब की सुविधा उपलब्ध कराया जाएगा।

राजनीतिक भविष्य तय करेगा कांग्रेस महाधिवेशन!

खाद्य सुरक्षा, आर्थिक व राजनीतिक प्रस्ताव पर होगी चर्चा
ओ.पी. पाल
125वीं वर्षगांठ पर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों का समापन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित पार्टी के 83वें महाधिवेशन को कांग्रेस ऐसे समय में मनाने जा रही है जब वह भ्रष्टाचार और घोटाले के मुद्दे पर विपक्ष से चौतरफा घिरी हुई है, वहीं बिहार विधानसभा चुनाव में हुई फजीहत के साथ आगामी चुनाव पर लगी निगाहों के साथ कांग्रेस के आंध्र प्रदेश संकट उसके सामने एक चुनौती के रूप में मुहं बाय खड़े हैँ। बाहरी दिल्ली के बुराड़ी में होने वाले कांग्रेस महाधिवेशन की सफलता के लिए पार्टी खासकर दिल्ली इकाई अपनी पूरी ताकत झोंक रही है।कांग्रेस पार्टी का तीन दिवसीय महाधिवेशन 18 से 20 दिसंबर तक होगा, जिसमें पहले दिन यानि 18 दिसंबर को 11 बजे संसदीय सौंध में कांग्रेस पार्टी की विषय(ड्राफ्ट) समिति की बैठक होगी, जिसमें महाधिवेशन में आने वाले प्रस्तावों का मसौदा तैयार किया जाएगा, जिसमें कांग्रेस पार्टी मुख्य रूप से कांग्रेस के 125 साल के सफर पर एक प्रस्ताव पारित करेगी, जबकि इसी बैठक में राजनीति तथा आर्थिक और अन्य प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाएगा। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव आस्कर फर्नांडीस ने बताया कि पार्टी की विषय संबन्धी बैठक में महाधिवेशन में पारित किये जाने वाले प्रस्तावों को अंतिम रूप देंगे, जिनमें खाद्य सुरक्षा पर भी प्रस्ताव के लिए एक मसौदा तैयार किया जाएगा। उन्होंने उन संभावनाओं को क्षीण कर दिया है कि इस महाधिवेशन में राष्ट्रीय कार्य समिति या राज्यों के अध्यक्षों की घोषणा की जाएगी। उनका कहना है कि कांग्रेस पार्टी की पंरपरा है कि महाधिवेशन में राष्ट्रीय कार्य समिति का चुनाव किया जाएगा, लेकिन उसकी घोषणाएं महाधिवेशन के बाद की जाएगी। महाधिवेशनमें पार्टी की पंरपरागत तरीके को अपनाते हुए 19 दिसंबर को नवनिर्वाचित पार्टी अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी को मंच तक लाया जाएगा, जिसके बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, महासचिव राहुल गांधी सरीके पदाधिकारियों को मंच पर स्थान दिया जाएगा। महाधिवेशन के दूसरे दिन मंच से कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी का अध्यक्षीय भाषण होगा, जिसके बाद प्रधानमंत्री डा.मनमोहन सिंह, महासचिव राहुल गांधी एवं अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं का संबोधन भी होगा। इसके अलावा पार्टी के 125वें वर्ष केउपलक्ष्य में महाधिवेशन में प्रत्येक राज्य से एक-एक स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित किया जाएगा। एक घंटे का सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी इसी दिन आयोजन किया गया है। महाधिवेशन के अंतिम दिन 20 दिसंबर को पार्टी ड्राफ्ट समितियों द्वारा तैयार प्रस्तावों को पारित किया जाएगा। आस्कर फर्नांडीस ने कहा कि इस महाधिवेशन में पूरे देश से अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी के करीब 1250, राज्य कांग्रेस कमेटियों के दस हजार तथ 1507 कार्यकर्ताओं और आमंत्रित सदस्यों समेत करीब 15 हजार प्रतिनिधि हिस्सेदार बनेंगे। इन सब कार्यक्रमों के साथ पार्टी के महाधिवेशन की सफलता के लिए दिल्ली कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल, मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और दिल्ली सरकार के मंत्री एवं पदाधिकारी अपनी पूरी ताकत झौंकने में लगे हुए हैं। कांग्रेस का यह महाधिवेशन ऐसे समय आयोजित किया जा रहा है जब कांग्रेस पार्टी भ्रष्टाचार व घोटाले के मुद्दे पर विपक्ष से चौतरफा घिरी हुई है और बिहार चुनाव के नतीजों से निराश कांग्रेस पार्टी को कुछ राज्यों में आने वाले समय में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर भी चिंतित है जिसके लिए पार्टी नई रणनीतियों को तैयार करने के लिए आत्ममंथन करने में भी जुटी हुई है। महाधिवेशन में कांग्रेस खाद्य सुरक्षा को लेकर एक प्रस्ताव तैयार कर रही है ताकि वह भ्रष्टाचार और घोटालों के कारण झेल रही फजीहत के बोझ को हलका कर सके। क्योंकि दूसरी और प्रमुख विपक्षी दल भाजपा के नेतृत्व में राजग और अन्य विपक्षी दल अलग-अलग मंच से 2जी स्पेक्ट्रम और आदर्श सोसायटी आवंटन घोटाले के साथ राष्ट्रमंडल खेलों में हुए भ्रष्टाचार को लेकर संसद के बाद अपने अभियान को सड़कों पर लेकर खड़े हुए हैँ। इसलिए कहा जा सकता है कि 125वें वर्ष में कांग्रेस का महाधिवेशन देश की राजनीति खासकर कांग्रेस के लिए एक नया रास्ता तय करेगा।

सोमवार, 13 दिसंबर 2010

चुनौतियों भरा होगा कांग्रेस का अधिवेशन!

घोटालों व भ्रष्टाचार पर मुश्किल में फंसी है कांग्रेस
ओ.पी. पाल
यूपीए सरकार का नेतृत्व कर रही कांग्रेस पार्टी का अधिवेशन 18 दिसंबर से शुरू होगा, जो भ्रष्टाचार और घोटालों के मुद्दे पर फजीहत झेल रही कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती से कम नहीं होगा। इसका कारण साफ है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के शासनकाल में सामने आ रहे भ्रष्टाचार और घोटाले के मुद्दे पार्टी की मुश्किलों को निरंतर बढ़ाते आ रहे हैं। राष्ट्रीय राजधानी में अगले सप्ताह होने वाले कांग्रेस के तीन दिवसीय अधिवेशन ऐसे समय हो रहा है जब विपक्ष से घिरी यूपीए सरकार में उसका नेतृत्व करने वाली कांग्रेस पार्टी की मुश्किलें बढ़ाती नजर आ रही है। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में जेपीसी की मांग को लेकर संसद का पूरा शीतकालीन सत्र हंगामें की भेंट चढ़ने की दहलीज पर खड़ा है, जिसका सोमवार को अंतिम दिन है और अंतिम दिन भी विपक्ष की एकजुटता और जेपीसी की मांग पर अड़िग विपक्ष की चेतावनी को देखते हुए हरेक दिन की तरह बाधित होने के संकेत कर रहा है। यदि सोमवार को भी संसद की कार्यवाही नहीं चल पाई तो यह भारतीय संसद के इतिहास में शायद पहला मौका होगा जब पूरा संसद सत्र किसी मुद्दे को लेकर हंगामे की भेंट चढेÞगा? ऐसे में यूपीए सरकार का नेतृत्व करने वाली कांग्रेस पार्टी की राजनीति ही प्रभावित हो रही है। ऐसे में अगले सप्ताह अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी का अधिवेशन 18 दिसंबर से शुरू होगा, जब कांग्रेस 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले, राष्ट्रमंडल खेलों में हुए गोलमाल तथा आदर्श सोसायटी घपले के कलंक से जूझ रही है। इस अधिवेशन में इनके अलावा अन्य अनेक महत्वपूर्ण मुद्दो पर चर्चा निश्चित रूप से होगी। कांग्रेस के इस अधिवेशन में खासकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के लिए उनकी राजनीति जीवन की सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है, क्योंकि भ्रष्टाचार और घोटालों की श्रृंखला की पृष्ठभूमि में इस मुद्दे पर राजग और गैर राजग विपक्ष कांग्रेस पर घेराबंदी कसते जा रहे हैं। कांग्रेस प्रमुख श्रीमती सोनिया गांधी स्वयं भी भ्रष्टाचार और लालच के बढ़ते मामलों को लेकर चिंता जता चुकी हैं। 2जी स्पेक्ट्रम मामले में विपक्ष ने संसद का पूरा शीतकालीन सत्र बाधित कर सरकार को घेरते हुए विपक्ष पहले ही अपने आपको मजबूत साबित कर चुका है। विपक्ष कांग्रेस को इसलिए भी घेरे हुए हुए है कि एक माह पूर्व दिल्ली के तालकटोरा आडोटीरियम में हुई कांग्रेस की राष्टÑीय कार्यकारिणी की बैठक में प्रधानमंत्री, सोनिया ही नहीं कांग्रेस का कोई अन्य बड़ा या छोटा नेता भ्रष्टाचार के मुद्दे पर एक भी शब्द नहीं बोल पाया था, जिसे लेकर प्रमुख विपक्षी दल ने तीखी टिप्पणियां की थी। हालांकि उसके बाद कांग्रेस हाईकमान ने मुंबई में आदर्श सोसायटी घोटाले में लिप्त महाराष्टÑ के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को हटाया है, तो 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में जद्दोजहद के बाद संचार मंत्री ए. राजा से भी प्रधानमंत्री इस्तीफ लेने में तो कामयाब रहे, लेकिन जेपीसी पर मनमोहन टस से मस भी नहीं हो पा रही है। बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हुई फजीहत के लिए कांग्रेस भी अहसास कर रही है कि उसका नतीजा भ्रष्टाचार और घोटालों के मुद्दे को विपक्षी दलों द्वारा जोरों से उठाये जाना ही है। हालांकि कांग्रेस के इस अधिवेशन में बिहार चुनाव के नतीजों की भी समीक्षा पर विचार होगा। कांग्रेस के लिए यह अधिवेशन इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि अगले साल तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल,असम और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने है जिसके लिए उसे अपनी रणनीति तय करनी होगी। वहीं वर्ष 2012 में उत्तर प्रदेश और भाजपा शासित गुजरात सहित कुछ अन्य राज्यों में विधानसभा चुनाव भी ऐसे दौर से गुजर रही कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। इन सभी चुनौतियों का सामना किस रणनीति से किया जाए कांग्रेस का अधिवेशन खासकर इसी पर केंद्रित होगा। कांग्रेस प्रमुख सोनिया के सामाने यह भी एक समस्या बनी हुई है कि वह पार्टी की 25 सदस्यीय शीर्ष नीति निर्धारक निकाय 'कांग्रेस कार्य समिति' का पुनर्गठन करने में विलंब हो रहा है, जो अधिवेशन से पहले ही होना था। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी अधिवेशन में सबसे पहले कांग्रेस कार्य समिति पर फैसला करेंगी।

रविवार, 12 दिसंबर 2010

शिक्षा बिना युवा आबादी बन सकती है अभिशाप!

 रिपोर्ट: 80 करोड़ आबादी 20 रुपये रोज पर जीने को मजबूर
ओ.पी. पाल
भले ही वैश्विक वित्तीय संकट के बाद तीव्रता से पटरी पर लौट रहे आर्थिक विकास वाले देशों की सूची में भारत भी शामिल हो,लेकिन अगले दो दशकों में युवा आबादी का विकास सामाजिक उथल-पुथल का कारण हो सकता है यानि शिक्षा के विकास के बिना आने वाले सालों में युवा आबादी देश के लिए एक अभिशाप भी बन सकती है। इस प्रकार के तथ्य हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के तथ्यों एवं विशेषज्ञों की राय से भी सामने आ रहे हैं।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार ने इस साल अप्रैल में 14 साल की उम्र तक के बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार कानून पास किया है लेकिन इस पर अमल के लिए स्कूलों और शिक्षकों का अभाव है। इस कानून पर अमल के लिए 12 लाख शिक्षकों की जरूरत है लेकिन इस समय भारत में सिर्फ 7 लाख शिक्षक हैं और उनमें भी 25 फीसदी काम पर नहीं जाते। भारत में साक्षरता दर 65 प्रतिशत है जबकि चीन में यह 91 प्रतिशत और यहां तक कि केन्या में 85 प्रतिशत है। मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल 2020 तक हाई स्कूल पास करने वाले बच्चों की संख्या इस समय के 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करना चाहते हैं। लेकिन ऐसा करने के लिए सैकड़ों नए कॉलेज और विश्वविद्यालय बनाने होंगे। इस मांग को पूरा करने के लिए भारत सरकार ने विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस बनाने की अनुमति देने वाले कानून का मसौदा तैयार किया है। जबकि विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार स्कूल में भर्ती होने वाले बच्चों में से 39 फीसदी 10 साल की उम्र में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं और 15 से 19 की आयु के किशोरों में सिर्फ 2 फीसदी का व्यावसायिक प्रशिक्षण मिलता है। भारतीय उद्योग महासंघ के अध्यक्ष हरि भारतीय मानते हैं कि हमारी सबसे बड़ी चुनौती स्कूल के स्तर पर है। जहां तक आबादी में हो रही वृद्धि का सवाल है उसमें हल ही में जारी डॉयचे बैंक की एक रिपोर्ट का दावा है कि अगले दो दशकों में भारत की काम करने वाली आयु की आबादी में 24 करोड़ की वृद्धि होगी, जो ब्रिटेन की कुल आबादी का चौगुना है। लेकिन एशियन डेवलपमेंट बैंक के प्रबंध निदेशक रजत नाग ने हाल ही में नई दिल्ली में निवेशकों के एक सम्मेलन में चेतावनी दी थी कि शिक्षा के बिना आबादी का यह लाभ आबादी के अभिशाप में बदल सकता है। सरकारी आंकड़ों पर नजर डाले तो भारत में 80 करोड़ आबादी 20 रुपए रोजाना से कम पर जीवन यापन कर रही है.वरिष्ठ भारतीय विश्लेषक दीपक लालवानी का कहना है, कि यदि आर्थिक लाभ सभी लोगों को शामिल करने वाले, रोजगार देने वाले और जीवन स्तर ऊंचा उठाने वाले न हों तो सामाजिक समरसता प्रभावित होगी। विशेषज्ञों के अनुसार भारत उस स्तर पर पहुंचने वाला है जहां श्रम बाजार में घुसने वाले युवा कामगारों की बड़ी संख्या बचत और निवेश के जरिए महत्वपूर्ण आर्थिक लाभ का कारण बन सकती है। चीन ने 1980 के दशक में इस स्तर पर पहुंचने के बाद आर्थिक विकास की ऊंची छलांग लगाई थी। भारत की 120 करोड़ आबादी का आधा से अधिक हिस्सा 25 साल से कम आयु का है। विशेषज्ञों की माने तो 2020 तक भारतीयों की औसत आयु 29 होगी जबकि उस समय चीन की औसत आयु 37 होगी। चीन की कामकाजी आबादी अगले पांच साल में चोटी पर होगी और उसके बाद उसका गिरना शुरू हो जाएगा, जो आंशिक रूप से उसकी एक बच्चे वाली नीति का नतीजा है। वहीं 2035 तक भारत की आबादी 150 करोड़ होगी और उसमें कामकाजी आबादी 65 फीसदी होगी, लेकिन रजत नाग मानते हैँ कि भारत को लाभ तभी मिलेगा जब उसके कामगार प्रशिक्षित हों। विशेषज्ञों के अनुसार युवा आबादी को शिक्षा देने की चुनौती बहुत भारत इस मामले में अभी तक बहुत पीछे है। 

मंगलवार, 7 दिसंबर 2010

यातना के दोषियों की अब खैर नहीं!

यातना निवारण विधेयक में दोषियों को मृत्युदंड का प्रावधान
ओ.पी. पाल
यदि सरकार ने पिछले तेरह साल से चल रही कवायद को अंजाम देते हुए राज्यसभा की प्रवर समिति की सिफारिशों को स्वीकार किया तो यातना निवारण विधेयक 2010 देश में होने वाली यातनाओं को रोकने में भारत को एक बड़ी कामयाबी मिल जाएगी।सबसे ज्यादा यातनाओं और मानवाधिकार के उल्लंघन की शिकायतें पुलिस के खिलाफ आती हैं। इस यातना निवारण विधेयक में संशोधन के लिए जो जिन प्रावधानों को कानून में शामिल करने की सिफारिश की गई है उसमें पुलिस हिरासत में प्रताड़ना की वजह से होने वाली मौत के दोषियों को आजीवन कारावास और मृत्युदंड की कठोर सजा के साथ ही कम से कम एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
पुलिस हिरासत या अन्य संस्थानों में प्रताड़ना के दोषियों के खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान करने के लिए राज्यसभा की प्रवर समिति के अध्यक्ष अश्विनी कुमार ने सदन में मंगलवार को यातना निवारण विधेयक 2010 की जांच रिपोर्ट अपनी कई महत्वपूर्ण सिफारिशों के साथ अपनी रिपोर्ट पेश की है। समिति द्वारा केंद्र सरकार से इस विधेयक में की गई सिफारिशों में सबसे महत्वपूर्ण सिफारिश यह है कि विधेयक में हिरासत में यातना के कारण मौत के दोषी पाये जाने वाले अधिकारी या व्यक्ति को मृत्युदंड देने का प्रावधान किया जाए। हालांक समिति ने झूठी शिकयतों की जांच का प्रावधान करने की सिफारिश है ताकि कोई निर्दोष अधिकारी या अन्य कोई इस कानून के शिकंजे में न फंस सके। यही नहीं दोषियों को कठोर सजा के साथ कम से कम एक लाख रुपये का जुर्माना देने का भी प्रावधान है। राज्यसभा की प्रवर समिति के अध्यक्ष अश्वनी का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि सरकार समिति की सिफारिशों को मंजूर करके विधेयक में संशोधन करके उसे पारित कराएगी, ताकि देश में चल रहे मानवाधिकार उल्लंघन और यातना के दौर का खात्मा हो सके। देशभर में पुलिस हिरासत में मौत होने के आंकड़े लगातार बढ़ने से केंद्र सरकार पिछले तेरह साल से यातना निवारण विधेयक में संशोधन करके कड़े प्रावधान करने की कवायद करती रही। देश में होने वाली मानव यातनाओं और मानवाधिकारों के उल्लंघन पर संयुक्त राष्ट ने भी चिंता जाहिर करते हुए भारत से सख्त कानून लागू करने का सुझाव दिया था। इसके लिए यूपीए सरकार ने यातना निवारण विधेयक 2010 का मसौदा तैयार करके उसे लोकसभा में इसी साल बजट सत्र के दौरान 26 अप्रैल को पुर:स्थापित किया था। इस विधेयक को राज्यसभा में 31 अगस्त को स्वीकृति के प्रस्ताव पर विधेयक की जांच करने और इस संबन्ध में की जिसे लोकसभा में 6 मई 2010 को पारित भी कर दिया गया, लेकिन उच्च सदन इस विधेयक में सख्त सजा के प्रावधान न होने के कारण हुए विरोध के कारण इसे पेश नहीं किया जा सका था। सभापति मोहम्मद हामिद अंसारी ने 31 अगस्त 2010 को इस विधेयक की जांच के लिए इसे राज्यसभा की 13 सदस्यीय प्रवर समिति को सौँप दिया था। प्रवरण समिति ने जांच करने के लिए तिहाड़ जेल में भी कैदियों से बातचीत की और अन्य पक्षों के भी विचार सुनने के बाद बिल में कड़ी सजा के प्रावधान करने की सिफारिश की है। इस प्रताड़ना निवारण विधेयक में समिति ने सरकारी शिक्षण संस्थाओं, सरकारी कंपनियों और संगठनों के कर्मचारी को लोक सेवकों के दायरे में लाने की भी सिफारिश की है। रिपोर्ट में सरकारी शिक्षण संस्थाओं, सरकारी कंपनियों और संगठनों के कर्मचारियों को शामिल करने के लिए लोक सेवकों की परिभाषा का विस्तार करने, प्रताड़ना के लिए कड़ी सजा का प्रावधान करने की और हिरासत में प्रताड़ना के कारण होने वाली मौत के लिए उम्रकैद या मृत्यु दंड की सिफारिश की गई है। वहीं सिफारिशों में महिलाओं के खिलाफ यौन दुर्व्यवहार और बच्चों को प्रताड़ना को संकेतात्मक विधेयक की सूची में जोड़ा गया है। संशोधित विधेयक में आरोपी के खिलाफ मुकदमा चलाने की पूर्व अनुमति लेने का प्रावधान यथावत है। इस प्रस्तावित कानून भारत को प्रताड़ना की रोकथाम पर संयुक्त राष्ट्र समझौते की अभिपुष्टि करने में मदद करेगा। इस समझौते पर 1997 को हस्ताक्षर किए गए थे। यह विधेयक सशस्त्र बलों पर लागू होगा और प्रताड़ना की शिकायत मिलने पर सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम पर भी प्रभावी होगा।

सोमवार, 6 दिसंबर 2010

थॉमस बने केंद्र सरकार के गले की फांस!

सीवीसी को हटाने के लिए सरकार के पास
महाभियोग योग का ही एक मात्र तरीका
ओ.पी. पाल
केंद्र की यूपीए सरकार भ्रष्टाचार और घोटालों के मुद्दे पर संसद में पहले ही विपक्ष से घिरी हुई है तो केंद्रीय सतर्कता आयोग के आयुक्त की नियुक्ति को लेकर जवाब तलबी के लिए मिले सुप्रीम कोर्ट के नोटिस ने उसकी मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। दूसरी और सीवीसी पीजे थॉमस केंद्र सरकार की बात को कोई तरजीह देने को तैयार नहीं हैं और उनके सीवीसी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा न देने के मामले ने यीपीए सरकार के सिरदर्द को और बढ़ा दिया है। यानि पीजे थॉमस केंद्र सरकार के गले की फांस बनते नजर आ रहे हैं।
देश में भ्रष्टाचार और घोटालों के कारण लगातार फजीहत झेलती आ रही कंग्रेसनीत यूपीए सरकार यदि लोकसभा में विपक्ष की नेता श्रीमती सुषमा स्वराज की बात मान लेती तो शायद भ्रष्टाचार की जांच करने वाली केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के अध्यक्ष पीजे थॉमस को लेकर केंद्र सरकार के ऊपर उंगलिया न उठती और ना ही सरकार को सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के चलते एक बार फिर से शर्मसार होना पड़ता। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक ऐसे व्यक्ति को सीवीसी के अध्यक्ष पद पर नियुक्त करने के लिए जवाब मांगने के लिए अदालत में पेश होकर सफाई देने के लिए नोटिस जारी किया, जिसके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले चले हों। ऐसी टिप्पणी करते हुए पहले ही अदालत यह दलील दे चुकी है कि भ्रष्टाचार का हिस्सा रहा व्यक्ति भला भ्रष्टाचार के खिलाफ कैसे जांच कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने आज सोमवार को केंद्र सरकार के अलावा सीवीसी आयुक्त पीजे थॉमस को भी नोटिस भेजा और अदालत में हाजिर होकर अपने ऊपर लगे आरोपों की सफाई पेश करने के लिए कहा है। गत सात सितंबर को सीवीसी प्रमुख के पद पर केंद्र सरकार ने 1973 बैच के केरल कैडर के भारतीय प्रशासनिक अधिकरी पीजे थॉमस की नियुक्ति की थी। सीवीसी जैेसी संस्था के आयुक्त पद के लिए बनी चयन समिति में लोकसभा की प्रतिपक्ष नेता श्रीमती सुषमा स्वराज भी एक सदस्य के रूप में शामिल है। चयन समिति में जब सीवीसी प्रमुख की नियुक्ति के लिए पी.जे. थॉमस के नाम का प्रस्ताव आया तो उसे सीवीसी बनाए जाने का सुषमा स्वराज ने कड़ा विरोध करते हुए आरोप लगाए थे कि एक दागी पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को भ्रष्टाचार पर नजर रखने वाले इस महत्वपूण्र आयोग का प्रमुख नहीं बनाया जाना चाहिए। इस संबन्ध में भाजपा ने राष्टÑपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल से भी आग्रह किया था कि वह इस पद के लिए थॉमस के नियुक्ति पत्र पर हस्ताक्षर न करें। यही नहीं थॉमस को सीवीसी बनाए जाने के तीन सदस्य चयन समिति के बहुमत के फैसले से खुद को अलग करते हुए सुषमा स्वराज ने अपने असहमति नोट में आरोप लगाय है कि थॉमस 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले पर पर्दा डालने में शामिल रहे हैं जिसे सीवीसी नहीं बनाया जा सकता। उस दौरान तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वयं भी भाजपा के विरोध को खारिज करते हुए कहा था कि सीवीसी के लिए जिन तीन नामों का सुझाव आया है उनमें पीजे थॉमस ही सर्वश्रेष्ठ हैं। थॉमस के सीवीसी का पद ग्रहण करने के बाद केंद्र सरकार को लगे ग्रहण से निश्चित केंद्र सरकार को इस बात का पश्चतावा होगा कि काश! वह भाजपा के विरोध पर गंभीरता से गौर कर लेती तो आज यह फजीहत न होती। यही नहीं थॉमस केरल में भी एक भ्रष्टाचार के मामले के आरोपी बताये जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार सीवीसी की नियुक्ति पर जब उच्चतम न्यायालय ने कड़ा रूख अपनाया तो पिछले सप्ताह कांग्रेस कोर ग्रुप तथा सरकार ने अलग-अलग बैठक करके थॉमस को सीवीसी पद से इस्तीफा देने को कहा था, जिसमें थॉमस ने विचार करने की हामी भर ली थी, लेकिन बाद में थॉमस ने ताल ठोककर मीडिया के समक्ष कहा था कि वह सीवीसी हैं-सीवीसी रहेंगे और वे इस पद से इस्तीफा देने नहीं जा रहे हैं। ‘अब पछताए क्या होत..जब चिड़िया चुग गई खेत’ वाली कहावत केंद्र सरकार के लिए चरितार्थ होती सामने आई। जब थॉमस इस्तीफा न देने की जिद पर अड़िग हो तो ऐसे में उन्हें हटाने के दो ही तरीके बचते हैं, जिसमें सुप्रीम कोर्ट में पीयूसीएल की ओर से पैरवी कर रहे वकील प्रशांत भूषण के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट थॉमस की नियुक्ति रद्द करने का आदेश देकर उन्हें हटा सकता है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो उन्हें हटाने का एक मात्र तरीका उन पर महाभियोग चलाना होगा। संविधान की धारा १२४ (४) में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों को हटाने के लिए महाभियोग की प्रक्रिया का जिक्र है। किसी संवैधानिक पद पर काबिज शख्स को हटाने के लिए महाभियोग की प्रक्रिया अपनाने का प्रावधान संविधान में है। थॉमस की सीवीसी के तौर पर नियुक्ति को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में आखिरी फैसले के लिए अगले साल २७ जनवरी की तारीख तय की है, लेकिन पीजे थॉमस ऐसे समय केंद्र सरकार के गले की फांस बन चुके हैं जब कांग्रेसनीत यूपीए सरकार पहले ही भ्रष्टाचार और घोटालों के मुद्दे पर विपक्ष की एकजुटता से घिरी हुई है।

रविवार, 5 दिसंबर 2010

संसद में गतिरोध बनाम जेपीसी!

विपक्ष पर कोई भी दांव खोल सकती है सरकार
ओ.पी. पाल
बहुचर्चित 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले पर आखिर कांग्रेसनीत सरकार संयुक्त संसदीय समिति का गठन नहीं करेगी? इस सवाल का जवाब यही है कि संसद में पिछला इतिहास इस बात का गवाह रहा कि बोफोर्स कांड पर 45 दिनों तक ठप रही संसद की कार्यवाही के बावजूद विपक्ष के शोर शराबे के बाद ही ना..ना.. करते सत्तारूढ़ सरकार जेपीसी गठित करने पर राजी हुई थी। बोफोर्स कांड ही नहीं ऐसे कई मामले रहे, जिसमें जेपीसी का गठन करना पड़ा, लेकिन संसद के शीतकालीन सत्र के पहले 16 दिन की दोनों सदनों में ठप रही कार्यवाही को सुचारू करने के लिए यूपीए सरकार कौन सा दांव खोलती है इसी का पूरे देश को इंतजार है।
संसद के शीतकालीन सत्र शुरू होने से यूपीए सरकार जानती थी कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले, आदर्श सोसायटी तथा राष्ट्रमंडल खेलों में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर विपक्ष उसे घेरने की तैयारी कर चुका है। विपक्ष ने इस हमले से बचने के लिए संसद के शीतकालीन सत्र शुरू होने के बाद 2जी स्पेक्ट्रम पर कैग की रिपोर्ट में खुलासे पर गंभीर सरकार ने केंद्रीय संचार मंत्री ए. राजा से इस्तीफा ले लिया था, लेकिन इतने पर ही विपक्ष संतुष्ट नहीं था, जिसमें संयुक्त संसदीय समिति का गठन करने की मांग पर समूचा विपक्ष ऐसा एकजुट हुआ कि कांगे्रसनीत यूपीए सरकार के सभी दांव विपक्ष की एकता को तोड़ने में विफल साबित हो रहे हैं। जहां तक विपक्ष की जेपीसी की मांग है उसे देश की जनता को भी समर्थन मिल रहा है जिसमें पौने दो लाख करोड़ रुपये के घपले का सवाल है। इसलिए विपक्ष को भी बल मिला हुआ है। जेपीसी की मांग को लेकर प्रमुख विपक्षी दल के साथ एकजुट अन्य दल को भी इस बात का भय है कि यदि वे पीछे हटे तो उनके दल की राजनीति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा जो बिहार के विधानसभा चुनाव के नतीजों से जाहिर हो चुका है। यूपीए सरकार द्वारा जेपीसी के गठन से इंकार करने का अडियल रवैया भी विपक्ष के पक्ष में जा रहा है। यह यूपीए भी समझ रहा है जिसके लिए कई सर्वदलीय बैठक बुलाकर सरकार ने बीच का रास्ता निकालने का भी प्रयास किया। राजनीतिकार मानते हैं कि विपक्ष की एकता को तोड़ने के लिए यूपीए सरकार सदन में जिस प्रकार शोरशराबे में कुछ काम कराने का प्रयास कर रही है वह इस समस्या का हल नहीं है और ऐसे में सदन में विपक्ष के कोई मायने नहीं होते। राजनीतिक विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि संसद में कई ऐसे मामले उठे जिनके लिए जेपीसी की मांग को लेकर विपक्ष के हंगामे के बाद ही सरकार जेपीसी बनाने पर मजबूर हुई है और उन पिछले मामलों की अपेक्षा 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला अत्यंत महत्वपूर्ण है। संसद के मौजूदा सत्र में जेपीसी की मांग को लेकर 16 दिन की कार्यवाही ठप रही है और अभी शीतकालीन सत्र 13 दिसांर तक चलना है, लेकिन विपक्ष के जेपीसी की मांग पर अड़िग होने के मुकाबले यूपीए सरकार भी जेपीसी के गठन न करने की जिद पर अड़ी हुई है। जिस तरह का सत्तारूढ़ सरकार और विपक्ष की एकजुटता के बीच घमासान चल रहा है उसे देखते हुए नहीं लगता कि संसद के सदन अगले दिनों में भी कार्यवाही के लिए शांत रहेंगे? और यह कहना तो उचित नहीं होगा कि इस हंगामे से संसद की बाधित कार्यवाही के मामले में पिछले इतिहास को दोहराएगी, क्योंकि पिछला इतिहास तो इसी बात का गवाह है कि शोर शराबे के बाद सरकार जेपीसी का गठन करने पर मजबूर हुई है। जहां तक संसद में जेपीसी पर शोर शराबे का सवाल है उसमें सासे ज्यादा दिन 45 दिनों तक बोफोर्स घोटाला मामले में चले शोर शराबे और व्यवधान के बाद सरकार ने जेपीसी की घोषणा की थी। इसी प्रकार हर्षद मेहता से जुड़े प्रतिभूति एवं बैंक घोटाला मामले में जेपीसी की मांग को लेकर 17 दिन तक संसद की कार्यवाही बाधित रही, तो केतन पारिख से जुड़े शेयर घोटाला मामले में जेपीसी की मांग पर 15 दिन तक संसद की कार्यवाही बाधित होने के बाद जेपीसी बनानी पड़ी है। जेपीसी को लेकर ठप संसद के ठप रहने के इतिहास में और भी कई पृष्ठ हैं जिनमें तत्कालीन संचार मंत्री सुखराम के मामले में एक पखवाड़े से ज्यादा दिन तक संसद की कार्यवाही विपक्ष के हंगामे की भेट चढ़े हैं। इन सभी मामलों में शोर शराबे के बाद सरकार को जेपीसी का गठन करना पड़ा है, लेकिन मौजूदा संसद सत्र में यूपीए सरकार का नेतृत्व कर रही कांग्रेस पार्टी केवल विपक्ष से संसद चलने की अपील कर रही है या फिर वह विपक्ष की एकता को तोड़ने के दांव तलाश रही है। अब देखना है कि अगले दिनों में कांग्रेसनीत यूपीए विपक्ष के खिलाफ कौन सा दांव खोलती है या फिर जेपीसी का गठन करने को तैयार होती है?

शनिवार, 4 दिसंबर 2010

सीबीआई वेबसाइट की सुरक्षा पर खड़े सवाल!

भारत की 270 वेबसाइट हैक कर चुके हैं पाकिस्तानी हैकर
ओ.पी. पाल
दुनिया में वेबसाइट हैकरों के हमलों में भारत की सबसे सुरक्षित माने जाने वाली केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की वेबसाइट भी हैक कर ली गई। हैक करने वाले पाकिस्तानी सायबर आर्मी ने उल्टे भारतीय सायबर आर्मी को चेतावनी तक दे डाली। सीबीआई की वेबसाइट का हैक होना उसकी सुरक्षा प्रणाली पर भी सवालिया निशान खड़े करता है जो 24 घंटे अंतरराष्ट्रीय पुलिस एजेंसी इंटरपोल से जुड़ी रहती है। भारत की सीबीआई समेत 270 वेबसाइट हैक करके पाकिस्तान ने अपना नापाक चेहरा एक बार फिर से जाहिर कर दिया है।
अमेरिका की विदेश नीति को हैक करने वाली विकिलिक्स के खुलासे ने दुनिया में हलचल मचा रखी है, लेकिन भारत में 24 घंटे अंतर्राष्ट्रीय पुलिस एजेंसी इंटरपोल से जुड़ी रहने वाली जिस सीबीआई की वेबसाइट को अत्यंत सुरक्षित माना जाता था उसे भी हैकिंग का शिकार होना पड़ा, जिसके कारण सीबीआई की वेबसाइट की सुरक्षा पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। भारत की सर्वोच्च जांच एजेंसी के रूप में पहचानी जाने वाली सीबीआई वेबसाइट के पहले पन्ने को शुक्रवार यानि 3/4 दिसंबर की रात्रि को पाकिस्तान सायबर आर्मी ने घुसपैठ करके हैक तो कर ही लिया, बल्कि हैकरों ने उस पर संदेश लिखकर भारतीय सायबर आर्मी को चेतावनी तक दे डाली कि भविष्य में उनकी यानि पाक की वेबसाइट पर हमला नहीं बोला जाना चाहिए। सीबीआई की साइट हैक कर उस पर 'पाकिस्तान साइबर आर्मी' (पीसीए) की ओर 'पाकिस्तान जिंदाबाद' के नारे तक लिखे हुए पाए गए। वहीं लिखा पाया गया कि यह पाकिस्तानी साइट हैक करने का नतीजा है। हैकरों ने कहा कि वे पहले ही कह चुके हैं कि हम सो रहे हैं मरे नहीं हैं। दूर रहो नहीं तो परेशान होंगे। यह दावा किया गया है कि पीसीए भारत की हरेक वेबसाइट हैक करने की ताकत रखता है। हम इसका लोकल सर्वर की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। हम तुम्हारे 31 हजार 337 हैकर्स को कहना चाहते हैं तुम बच्चे हो, जाओ कुछ और किताबें पढो।
चेतावनी देने वाली पाकिस्तान की सायबर आर्मी का भारतीय सायबर आर्मी पर यह भी आरोप लगाया है कि उसने पाकिस्तान की कई वेबसाइट को अपना निशाना बनाया है। हैकरों ने अपने संदेश में उन फिल्टर कंट्रोल के बारे भी लिखा है जिन्हें एनआईसी मुहैया कराती है। देश भर के कंप्यूटर सर्वरों का नियंत्रण एनआईसी के हाथों में है। खुफिया एजेंसियां काफी समय से सरकार को चेतावनी देती रही हैं कि भारत के अधिकतर कार्यालयों में सायबर सुरक्षा के प्रति ध्यान नहीं दिया जा रहा है जिससे खतरा पैदा हो रहा है। पाकिस्तान सायबर आर्मी ने अन्य वेबसाइटों को भी हैक करने की धमकी दी है। ऐसे में खुफिया एजेंसियों ने सरकार को आगाह किया है कि सरकारी दफ्तरों में उचित साइबर सुरक्षा मुहैया नहीं कराई गई तो हैकर भारत की अन्य महत्वपूर्ण दूसरी वेबसाइटों में भी गड़बड़ी कर सकते हैं। सीबीआई की खुद की वेबसाइट हैक हो जाना सीबीआई के खासी शर्मिंदगी के सबब से कम नहीं है यानि वेबसाइट के होम पेज पर पाकिस्तानी साइबर आर्मी की तरफ से चेतावनी भरे एक संदेश लिखकर पाकिस्तानी हैकरों ने सीबीआई की वेबसाइट को हैक कर भारत की साइबर सुरक्षा की कलई भी खोल दी है, जिसे सबसे सुरक्षित वेबसाइटों में से एक माना जाता है। एनआईसी देशभर में कंप्यूटर सर्वरों को नियंत्रित करती है। पाकिस्तान की इस हरकत के बाद हालांकि प्रेस सूचना अधिकारी ने बताया कि सीबीआई को इस बात की जानकारी है कि उसकी वेबसाइट को हैक कर लिया गया है। सूत्रों के अनुसार सीबीआई की वेबसाइट बंद हुई और पकिस्तान सायबर आर्मी के लोग होने की बात कहते हुए कुछ लोगो ने इस वेबसाइट को हैक करने का दावा किया तो भारतीय जांच एजेंसी हरकत में आई और सीबीआई के क्राइम सेल ने कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ सूचना तकनीकी कानून की कई धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज कर लिया है। यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान की इस हरकत में सीबीआई की ही नहीं, बल्कि भारत की अभी तक 270 प्रमुख वेबसाइट हैक की है जिससे पाकिस्तान का नापाक चेहरा भी सामने आ गया है।

शुक्रवार, 3 दिसंबर 2010

विपक्षी एकता तोड़ने के प्रयास में सरकार!

2जी स्पेक्ट्रम पर नहीं थम रहा गतिरोध
ओ.पी. पाल
देश में 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले पर सतारूढ़ और विपक्ष के बीच गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिसके कारण 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति के गठन की मांग पर अड़िग विपक्ष का लोकसभा और राज्यसभा में हंगामा बरकरार रहा। हालांकि विपक्ष के शोरशराबे में सरकार जरूरी दस्तावेज तथा कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों को बिना चर्चा के ही पारित कराकर विपक्ष की एकता को तोड़ने के फार्मूले का अपना रही है।
संसद के शीतकालीन सत्र में शुक्रवार को 16वें दिन की बैठक भी 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले पर जेपीसी के गठन की मांग को लेकर दोनों सदनो में विपक्ष ने हंगामा करके सदन की कार्यवाही को ठप कराने का काम किया, लेकिन पिछले मंगलवार को सर्वदलीय बैठक के बेनतीजा समाप्त होने पर कांग्रेसनीत यूपीए सरकार ने विपक्ष की एकता बिखरने के तोड़ में एक ऐसा फार्मूला अपनाना शुरू कर दिया कि विपक्षी दलों के शोर शराबे के बीच ही जहां आवश्यक दस्तावेजों को पटल पर रखवा दिया जाता है, वहीं हंगामे और नारेबाजी के शोरशराबे में सरकार ने कुछ जरूरी विधेयकों को पेश कराकर उन्हें बिना चर्चा के ही पारित कराना शुरू करा दिया है। शुक्रवार को भी दोनों सदनों में ऐसे ही कई बिलों को सरकार पेश कराने में सफल रही। सूत्र तो यहां तक कह रहे हैं कि जिस प्रकार सरकार ने महंगाई पर विपक्ष की एकता तो तोड़ा था उसी तरह विपक्ष को बिखरने के प्रयास में सरकार लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पेश कर सकती है। इसका कारण है कि महिला आरक्षण बिल पर पहले से ही विपक्ष बंटा हुआ है, जिसमें सपा, राजद, बसपा और कुछ अन्य दल महिला आरक्षण के मुद्दे पर अलग मत रखते हैं। महिला आरक्षण पर विपक्ष का बिखराव गत 9 मार्च को राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल के पारित होने के समय दिख चुका था। यह तो तय है कि सरकार संसद के शीतकालीन सत्र का सत्रावसन 13 दिसंबर से पहले नहीं करेगी, क्योंकि दोनों सदनों में विपक्ष के शोरशराबे के दौरान ही संसदीय कार्यमंत्री ने संसद के अगले सप्ताह होने वाले कार्यो की सूची जारी कर दी है। इसके विपरीत जेपीसी को लेकर प्रमुख विपक्षी दल भाजपा के साथ समूचा विपक्ष का दावा है कि जब तक 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के लिए जेपीसी का गठन नहीं होता उनकी सरकार से लड़ाई जारी रहेगी। शोरशराबे के बीच बिलों को पारित कराने पर विपक्ष का कहना है कि सरकार इस तरह से बिना चर्चा के बिल पारित कराकर विपक्ष की एकता को तोड़ने का प्रयास कर रही है, लेकिन इस मुद्दे पर विपक्ष की एकता मजबूत है और विपक्ष जनता की आवाज को सदन में उठा रहा है, लेकिन यूपीए सरकार अडयल रवैया अपना रही है।
16वें दिन भी हंगामा
संसद में शुक्रवार को लोकसभा में लोस अध्यक्ष श्रीमती मीरा कुमार ने सभापीठ पर बैठते ही भोपाल गैस त्रासदी की 26वीं वर्षगांठ पर श्रद्धांजलि दी तो उस समय विपक्षी दल शांत रहा और भोपाल गैस त्रासदी में मारे गये लोगों को श्रद्धांजलि भी दी, लेकिन जैसे ही प्रश्नकाल शुरू होना था तो उससे पहले ही हर रोज की तरह शुक्रवार को विपक्ष जेपीसी की मांग करता हुए सदन के बीचों बीच आ गया और शोर मचाने लगा। इस शोरशराबे की स्थिति में मीरा कुमार के पास लोकसभा की कार्यवाही को स्थगित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था और सदन की कार्यवाही को दोपहर बारह बजे तक स्थगित कर दिया गया। यही स्थिति राज्यसभा में रही। जहां राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी ने जैसे ही पहला प्रश्न लिया, विपक्ष जेपीसी की मांग करता हुआ नारे लगाने लगा। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले पर विपक्ष को मनाने की सरकार की अब तक की कोशिश नाकाम रही है और मंगलवार को सभी पार्टियों की बैठक का कोई नतीजा नहीं निकल सका था।

मंगलवार, 30 नवंबर 2010

जेपीसी पर गतिरोध में अटके कई महत्वपूर्ण बिल!

वी वांट जेपीसी के साथ ताज बदल जो तख्त बदल दो के नारे
ओ.पी. पाल
2जीस्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के लिए जेपीसी की मांग पर अड़िग विपक्ष का सत्तापक्ष के साथ गतिरोध बरकरार है जिसके कारण राज्यसभा में शीतकालीन सत्र के दौरान एक भी दिन सदन की कार्यवाही सुचारू नहीं हो सकी है। यही कारण है कि सरकार के एजेंडे में शामिल कई महत्वपूर्ण बिल संसद में पेश नहीं हो पा रहे हैं। इस सत्र में अभी तक जो नया दिखाई दिया वह केवल विपक्ष के हंगामे में मंगलवार को ‘वी वांट जेपीसी’ के साथ ‘ताज बदल दो तख्त बदल दो’ के नारे भी सुनने को मिले।
गत नौ नवंबर से आरंभ हुए संसद के शीतकालीन सत्र में मामूली कामकाज के अलावा अभी तक जिस प्रकार से दोनों सदनों की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी है और आने वाले दिनों में भी संभव नहीं है तो ऐसे में राष्ट्रहित के कामकाज तो प्रभावित हो ही रहा है, वहीं सरकार के एजेंडे में शामिल अत्याचार निवारण विधेयक 2010, शिक्षा प्राधिकरण विधेयक 2010, बीज विधेयक 2004, अपहरण रोधी (संशोधन) विधेयक2010, मुफ्त और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार(संशोधन) विधेयक संसद में पेश नहीं हो पा रहे हैं, वहीं पुनर्वास विधेयक, महिला आरक्षण बिल, खान व खनिज विकास और नियमन संशोधन विधेयक के अलावा पंचायती राज व शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए दो संशोधन विधेयक भी इसी सत्र में प्रस्तावित थे, जबकि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक बिल को सरकार ने इस सत्र में पेश न करने का फैसला कर लिया है। इसी प्रकार लोकसभा में पारित हो चुके यातना निवारण विधेयक जैसे कई ऐसे बिल हैं जो राज्यसभा में पेश किये जाने थे। लेकिन 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति के गठन की मांग को लेकर अडिग विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़े अभी तक के 13 दिनों को देखने तथा आने वाले दिनों में यही स्थिति को देखते हुए लगता है कि ये विधेयक इस सत्र में अटके रह जाएंगे। जहां तक शीतकालीन सत्र का सवाल है उसमें केवल पहले दिन लोकसभा में कुछ कार्यवाही चल सकी थी, जिसमें सड़क परिवहन एवं राजमार्ग से संबन्धित केंद्रीय मंत्री कमलनाथ से मात्र एक ही सवाल पूछा जा सका था। इस मामूली कामकाज के अलावा अभी तक संसद के दोनों सदनों लोकसभा व राज्यसभा में एक भी प्रश्नकाल नहीं हो सका है। हां इतना जरूर है कि विपक्ष के हंगामे के बीच सभापीठ से कुछ रिपोर्टे व दस्तावेज सदनों के पटल पर रखवा दिये जाते है, लेकिन सदन की कार्यवाही के नाम पर अभी तक का सत्र शून्य पर टका हुआ है। दोनों सदनों में ही सभापति के बैठने से पहले ही विपक्ष की एकजुटता वेल में नजर आने लगती है और शुरू हो जाता है 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले पर जेपीसी की मांग को लेकर हंगामा। राज्यसभा में शीतकालीन सत्र के 13वें दिन आज जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो सभापति मोहम्मद हामिद अंसारी ने विपक्षी दलों की ओर से अग्रणी रहने वाले ओडिसा के सांसद रुद्रनारायण पाणी को सभापति ने सभापीठ पर बैठते ही यहां तक कह दिया कि वह संसद के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। इसके बाद भी विपक्षी दलों ने ‘वी वांट जेपीसी’ के नारे लगाये, तो वहीं इस नारे में परिवर्तन करते हुए ‘ताज बदल दो तख्त बदल दो’ के नारे भी लगाए। इस नारे पर रुद्रनारायण पाणी का कहना था कि यह नया नारा नहीं है बल्कि पुराना नारा है, लेकिन भाजपा ही नहीं समूचा विपक्ष जेपीसी की मांग से पहले कोई समझौता करने वाला नहीं है। उनका कहना था कि यह विपक्ष का ही रूख नहीं, बल्कि देश की जनता की आवाज है जो 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में 1.70 लाख करोड़ का सरकार से हिसाब मांग रही है। उच्च सदन की तरह ही लोकसभा में जेपीसी को लेकर गतिरोध जारी है। 2जी स्पेक्ट्रम, आदर्श आवास सोसायटी और राष्ट्रमंडल खेलों में हुए भ्रष्टाचार को लेकर कांग्रेसनीत यूपीए सरकार विपक्ष से घिरी हुई है, लेकिन जिस प्रकार से विपक्ष जेपीसी की मांग पर अड़िग है उसी तरह सत्तापक्ष भी जेपीसी गठित न करने की जिद पर अड़ी हुई है, जो संसद के शीतकालीन सत्र की कार्यवाही को सुचारू करने में सबसे बड़ा गतिरोध बना हुआ है। इसके विपरीत सरकार इस सत्र के दौरान कई सर्वदलीय बैठक आयोजित कर विपक्ष से जेपीसी की जिद छोड़ने की अपील जरूर कर रही है, लेकिन सर्वदलीय बैठके सत्ता और विपक्ष के टकरा रहे अहम् के सामने बेनतीजा साबित हो रही हैं। ऐसा भी नहीं लगता कि सरकार संसद के शीतकालीन सत्र को समय से पूर्व अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने पर विचार करेगी? लेकिन सवाल है कि संसद में सत्ता व विपक्ष के बीच जेपीसी को लेकर जारी गतिरोध के कारण राष्ट्रहित के कई विधेयक संसद में पेश नहीं हो पाएंगे।

जगन रेड्डी ने बढ़ाई कांग्रेस की मुश्किलें!

भ्रष्टाचार पर पहले ही घिरी यूपीए सरकार
ओ.पी. पाल
ऐसे समय जब कांग्रेसनीत यूपीए सरकार भ्रष्टाचार और घोटाले के मुद्दे पर चौतरफा घिरी हुई है, तो आंध्र प्रदेश में कांग्रेस के बागी सांसद जगनमोहन रेड्डी ने पार्टी से इस्तीफा देकर कांग्रेस की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। भ्रष्टाचार व घोटालों के मुद्दों पर तो यूपीए सरकार को विपक्ष की एकजुटता ने इस कदर घेर रखा है कि संसद के शीतकालीन सत्र के अभी तक के 12 दिन हंगामें की भेंट चुके हैं और अभी संसद की कार्यवाही चलने के आसान पूरी तरह से क्षीण हैं।
यूपीए के दूसरे शासनकाल में जिस प्रकार 2जी स्पेक्ट्रम, मुंबई का आदर्श आवास सोसायटी घोटाला तथा राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों मेंभ्रष्टाचार खासकर कांग्रेस पार्टी के लिए मुश्किलें बढ़ाता जा रहा है। बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे जो कांग्रेस की उम्मीदों के विपरीत आए हैं जो कांग्रेस के भ्रष्टाचार और घोटालों का ही परिणाम है। बिहार चुनाव में सोनिया और राहुल का भी जादू काम नहीं आ सका, जिसे लेकर कांग्रेस के सामने पार्टी जनाधार के भविष्य पर भी सवालिया निशान खड़ा कर गये हैँ। इधर देश के सबसे बड़े घोटाले के रूप में सामने आए 2जी स्पेक्ट्रम के आवंटन घोटाले ने कांग्रेसनीत यूपीए सरकार की नींद हराम कर दी है, जिसमें 1.70 लाख करोड़ रुपये के नुकसान का कैग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है। प्रमुख विपक्षी दल भाजपा के साथ 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति के गठन की मांग को समूचा विपक्ष एकजुट है। विपक्ष ने कांग्रेसनीत यूपीए सरकार को चौतरफा घेर रखा है जिसके कारण संसद के शीतकालीन सत्र के पहले 12 दिन विपक्ष के हंगामे की भेट चढ़ चुके हैं और सत्तापक्ष की किसी भी अपील और कवायद का विपक्ष की एकजुटता पर कोई प्रभाव नहीं है यानि समूचा विपक्ष बिना जेपीसी के गठन से पहले संसद की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलवाने के लिए सहमत न होने की जिद पर अड़िग है। जब संसद में यूपीए सरकार का नेतृत्व कर रही कांग्रेस घोटालों और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चौतरफा घिरी हुई तो बिहार चुनाव के नतीजों के साथ ही आंध्र प्रदेश में कांग्रेस के सांसद जगनमोहन रेड्डी के इस्तीफे से कांग्रेस कहीं अधिक हलकान है, क्योंकि जगनमोहन रेड्डा राज्य के तीन दर्जन विधायकों के समर्थन का भी दावा कर रहे हैं। कांग्रेस को इस राजनीतिक संकट से आंध्र सरकार के अल्पमत में आने का भय तो सता ही रहा है। भले ही आंध्र प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा सदस्य वी हनुमंत राव यह कह रहे हों कि पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी के पुत्र व कडप्पा से पार्टी के सांसद वाईएस जगनमोहन रेड्डी के कांग्रेस से इस्तीफा देने से प्रदेश में कांग्रेस की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। जबकि दूसरी ओर कानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने जगन के पार्टी से इस्तीफा देने को कांग्रेस के लिए दुर्भाग्य करार दिया है। ऐसे में आंध्र प्रदेश में कांग्रेस को पार्टी जनाधार के भविष्य पर भी संकट साफ नजर आ रहा है। दरअसल पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस रेड्डी की हैलीकाप्टर दुर्घटना में हुई मौत के बाद उनके बेटे जगनमोहन रेड्डी मुख्यमंत्री बनना चाहते थे, लेकिन कांग्रेस हाईकमान ने के. रसौया को मुख्यमंत्री बना दिया था। तभी से जगन रेड्डी के बागी तेवर सामने आ रहे थे। इस संकट से निपटने के लिए हाल ही में कांग्रेस ने रसौया से इस्तीफा लेकर उनके स्थान पर एन किरण रेड्डी को मुख्यमंत्री बनाया, लेकिन कांग्रेस को यह दांव उल्टा नजर आया और जगनमोहन रेड्डी के बागी तेवर इस कदर आसमान पर गये कि सोमवार को उन्होंने कांग्रेस पार्टी को अलविदा कहकर नई पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया। यूपीए सरकार का नेतृत्व कर रही कांग्रेस के चौतरफा घिरे होने से कहा जा सकता है कि कांग्रेस पार्टी की मुसीबतें कम होने के बजाए बढ़ती जा रही है।

शुक्रवार, 26 नवंबर 2010

बिहार विस में बढ़ा दागियों का ग्राफ!

नीतीश का मंत्रिमंडल होगा बाहुबल से सराबोर
ओ.पी. पाल
बिहार विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करके जिस प्रकार से बाहुबलियों और धनाढ्य विधायकों का प्रवेश विधानसभा में हुआ है, उसे देखते हुए लगता है कि दुनिया के सबसे बड़े इस लोकतांत्रिक देश में चुनाव प्रणाली में सुधार करने की तेजी से की जा रही कवायद पूरी तरह से बेअसर है। मसलन पिछले विधानसभा चुनाव की अपेक्षा बिहार विधानसभा में इस बार ऐसे विधायकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई जिनके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैँ। खास बात यह है कि 243 सदस्यों वाली विधानसभा में पहुंचे 141 दागियों में 116 विधायक सत्तारूढ़ गठबंधन के ही हैं, तो जाहिर सी बात है कि नीतीश कुमार का मंत्रिमंडल भी दागियों से सराबोर रहेगा।
राजनीति के बढ़ते अपराधिकरण को नियंत्रित करने की वैसे तो सभी राजनीतिक दल दुहाई देते हैं लेकिन चुनाव के समय ऐसे ही दल अपराधियों को अपने गले लगाने में पीछे नहीं रहता। बिहार चुनाव की घोषणा के बाद चुनाव में धनबल और बाहुबल की प्रथा को समाप्त करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने सर्वदलीय बैठक का दौर भी चलाया, ताकि देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की परंपरा को बढ़ावा दिया जा सके। आश्चर्यजनक बात तो यह है कि केंद्रीय निर्वाचन की इस कदम को सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों ने अपना समर्थन तो दिया, लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों के चयन में इस पर अमल करना गंवारा नहीं समझा गया। यही कारण था कि बिहार विधानसभा चुनाव में 748 अपराधी छवि वाले प्रत्याशियों ने जोर अजमाइश की। चुनाव लड़ने वाले इन दागी प्रत्याशियों में 441 प्रत्याशी तो ऐसे रहे जिनके खिलाफ हत्या, लूट, अपहरण, डकैती, हत्या का प्रयास, बलात्कार जैसे संगीन मामले लंबित चल रहे हैं। बिहार विधानसभा चुनाव के सभी छह चरणों के प्रत्याशियों की घोषणा होने के बाद नेशनल इलेक्शन वॉच के राष्ट्रीय समन्वय अनिल बैरवाल और बिहार चुनाव समन्वक अंजेश कुमार द्वारा 2097 प्रत्याशियों द्वारा दाखिल शपथपत्रों का अध्ययन करने के बाद तथ्य उजागर किये। हालांकि जनता ने ज्यादातर दागियों को नकारा है, लेकिन इसके बावजूद 141 दागी प्रत्याशी चुनाव जीतकर विधानसभा में दाखिल हो गये हैँ, जिनमें 85 विधायक ऐसे हैं जिनके खिलाफ संगीन मामले लंबित चल रहे हैं। जबकि वर्ष 2005 की विधानसभा में ऐसे दागी विधायकों की संख्या 117 थी, जिनमें संगीन मामलों में शामिल 68 विधायक थे। इस बार बिहार में जद(यू)-भाजपा गठबंधन को इन चुनावों में प्रचंड बहुमत मिला और शुक्रवार को नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री की शपथ भी ले ली, लेकिन विधानसभा में पहुंचे 141 दागियों में अधिकांश यानि 116 विधायक सत्तारूढ़ दल के ही हैँ, जिनमें जद(यू) व भाजपा के 58-58 एमएलए हैं। यदि संगीन अपराध में लिप्त विधायकों की बात करें तो उसमें जद(यू) के 43 तथा भाजपा के 29 विधायक हैं। ऐसे में जाहिर सी बात है कि नीतीश कुमार का मंत्रिमंडल भी दागियों से सराबोर रहेगा। विधानसभा में राजद के 22 विधायकों में 13, कांग्रेस के चार में तीन, लोजपा के सभी तीन, सीपीआई का एक तथा छह निर्दलीयो में पांच ऐसे विधायक हैं जिनके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैँ। बिहार विधानसभा में पहुंचे दागियों में टॉप-10 में जद-यू के छह विधायक शामिल हैं, जिनमे नरेन्द्र कुमार पांडे के खिलाफ 23 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि इसी दल के प्रदीप कुमार व मनोरंजन सिंह के खिलाफ 18-18 आपराधिक मामले लंबित चल रहे हैं। इनके अलावा नरेन्द्र कुमार सिंह पर 15, अमरेन्द्र कुमार पांडेय पर 11, शिवजी राय पर आठ मामले लंबित हैँ। भाजपा के सतीश चन्द्र दूबे पर सात, आनंदी प्रसाद यादव पर पांच व अवनीश कुमार सिंह पर सात मामले हैँ। इनके अलावा कांग्रेस के मोहम्मद तोसीफ आलम के खिलाफ छह आपराधिक मामले लंबित हैँ।
करोड़पति विधायकों की संख्या बढ़ी
बिहार विधानसभा में इस बार 47 करोड़पति विधायक दाखिल हुए हैँ, जबकि वर्ष 2005 को गठित विधानसभा में केवल आठ करोड़पति विधायक निर्वाचित हुए थे। इन धनबल वाले विधायको में सबसे ज्यादा 27 जद-यू के विधायक शामिल हैं, जबकि भाजपा के दस, राजद के पांच और कांग्रेस के दो विधायक भी शामिल हैं।