शुक्रवार, 11 जून 2010

...तो यही है मुंबई हमलों का सच!

ओ.पी. पाल  
भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी की पूछताछ में मुंबई के 26/11 आतंकी डेविड कोलमेन हेडली द्वारा इन हमलों में पाक सेना अधिकारियों और खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ होने का खुलासा कोई नई बात नहीं है, इस बात को भारत डेढ़ दशक से कहता आ रहा है। मुंबई हमले के बाद तो अमेरिका और अन्य देशों ने भी पाकिस्तान में आतंकवाद के केंद्रों की पैठ बनाने में आईएसआई को असली जड़ माना है। अब जब अमेरिका में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी डेविड कोलमेन हेडली ने भी भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी से पूछताछ में भारत के खिलाफ सीमापार आतंकवाद के एक बड़े सच का खुलासा कर दिया है तो पाकिस्तान को भी सकारात्मक नीति से आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करके विश्व समुदाय का विश्वास हासिल करने की जरूरत है। विशेषज्ञों की माने तो जेहाद के नाम पर आतंकी संगठनों की असली जड़ पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई ही है। आईएसआई के आतंकी संगठनों से गहरी पैठ के कारण पाकिस्तान सरकार भी अपने ही देश में आतंकवादी घटनाओं के बावजूद आतंकी संगठनों पर कोई भी कार्रवाई करने में असमर्थ साबित हो रही है। भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने मुंबई आतंकी हमले के मास्टर माइंड माने जाने वाले डेविड कोलमेन हेडली से पूछताछ करके जो जानकारी हासिल की है उनमें भी मुंबई हमलों के उसी सच का खुलासा हुआ है जिसके लिए भारत ने पाकिस्तान को आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए दस्तावेज सौंप रखे हैं, लेकिन पाकिस्तान की नीयत में इतना खोट है कि वह भारत द्वारा सौंपे गये उन दस्तावेजों को किसी प्रकार का सबूत मानने को तैयार नहीं है। मुंबई हमले के सच को जिस प्रकार से भारत ने पाकिस्तान के समक्ष अपने डॉजियरों में बताया है वह हेडली से पूछताछ के बाद हुए खुलासे से भी मेल खा रहा है जिसमें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और पाक सेना के अधिकारियों मेजर समीर अली, मेजर हारून और मेजर इकाबाल की करतूत हमले की साजिश में करतूत भी शामिल है। यह भी किसी से छिपा नहीं है कि पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवाद के माध्यम से अपरोक्ष युद्घ लड़ रहा है। पाकिस्तान की नीति में ही आतंकवाद को प्रश्रय हासिल है और वहां आतंकवादियों को प्रशिक्षित करने के लिए चल रहे सैकड़ों प्रशिक्षण शिविरों में पाकिस्तानी सेना और आईएसआई अपना पूरा योगदान देती है। हां, अब जबकि हेडली ने अमेरिका में पूछताछ के दौरान यह खुलासा किया है, इसलिए इस खुलासे का महत्व काफी बढ़ जाता है। पिछले अनुभव यह बात साफ कर देते हैं कि भारत सरकार इस मसले पर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को घेरने में पूरी तरह सफल नहीं रही है और दुनिया भर में आतंकवादी घटनाओं की जड़ पाकिस्तान में होने के कई खुलासों के बावजूद अमेरिका सहित पश्चिमी देश पाकिस्तान पर कड़ा दबाव नहीं डालते। अमेरिका की हालत तो यह है कि वह आतंकवाद के खात्मे के लिए दुनिया भर से मिली रकम का पाकिस्तान पर दुरुपयोग का भी आरोप लगाता है, लेकिन अमेरिका अगले ही पल इस मद में मिलने वाली आर्थिक मदद भी पहले की तुलना में बढ़ा देता है। जाहिर है कि अमेरिका और पश्चिमी देश आतंकवाद के नाम पर दोहरा खेल खेल रहे हैं। पाकिस्तान के जाने माने विद्वान एवं साउथ एशिया सेंटर द अटलांटिक काउंसिल आॅफ यूनाईटेड स्टेट के निदेशक शुजा नवाज भी बहुत पहले इस बात को कह चुके हैं कि आईएसआई और लश्कर तैयबा जैसे आतंकवादियों के बीच इतने गहरे सम्बन्ध हैं कि आतंकी संगठनों को धन और संसाधनों की कोई कमी नहीं आने देते। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत पहले से ही कहता आ रहा है कि भारत के खिलाफ आतंकी हमलों के लिए आईएसआई और सेना के अधिकारियों द्वारा आतंकवादियों को आर्थिक और हथियारों तथा खुफिया सूचनाओं यानि हर तरह की मदद करता आ रहा है जो आतंकवादियों को प्रशिक्षण दिलाने में भी पूरा सहयोग करते आ रहे है। हेडली ने जैसा कि खुलासा किया है कि आईएसआई ने ही आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयाबा के साथ मिलकर मुंबई हमले की पाकिस्तान में साजिश रची थी और आतंकवादियों को दिशा निर्देश भी दिये थे। विधि विशेषज्ञ कमलेश जैन का कहना है कि इतने सनसनीखेज खुलासे के बाद भी भारत सरकार 26/11 के आतंकियों को कटघरे में लाकर खड़ा कर सके ऐसा नहीं लगता। उन्होंने भोपाल गैस त्रासदी के गुनाहगार वॉरेन एंडसरसन का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिकी नागरिक होने के नाते आरोपी एंडसरसन को राष्ट्रीय अतिथि की तरह देश से रवाना किया गया। ऐसा लगता है कि अमेरिका और पाकिस्तान के बिच भारत पीस रहा है कभी दबाव में तो कभी मजबूरी में चाहते हुए भी भारत कदम आगे नहीं बढ़ा पाता। कमलेश जैन यहभी मानती हैं कि भारत के खिलाफ नीयत में खोट को देखते हुए यह भी जरूरी नहीं कि हेडली के आरोपों को पाकिस्तान स्वीकार ही कर ले। भारत ही नहीं दुनिया के अन्य देश भी जानते हैं कि पाकिस्तान ही आतंकवाक का मुख्य केंद्र है जिसे अमेरिका भी मानता है, लेकिन अमेरिका की नीतियों के कारण भारत की सरकारभी दबाव में पाकिस्तान के खिलाफ वह कार्रवाई नहीं करती जिसकी आतंकवाद के नासूर को खत्म करने के लिए करने की जरूरत है। भारत व पाक सांन्धों के जानकार विशेषज्ञों का मानना है कि यह तो अमेरिका और पाकिस्तान भी जानता है कि आतंकवादी संगठनों को आईएसआई और सेना के मेजर स्तर के अधिकारियों की खुलकर मदद मिल रही है, लेकिन सवाल है कि पाकिस्तान सरकार का आईएसआई पर सीधा नियंत्रण नहीं है जो पाक सेना के अधीन है। ऐसे में राजनीतिक व रणनीतिक दृष्टि से पाकिस्तान चाहकर भी आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत को चाहिए कि अगले महीने होने वाली वार्ता में आतंकवाद के अलावा कोई बातचीत न की जाए। यदि पाकिस्तान आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने का सबूत दे तो तभी अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर पाक से वार्ता हो। एक विशेषज्ञ तो यहां तक कहते हैं कि भारत को पाक की इस कूटनीति को समझते हुए उसे साक सिखाने का माकूल समय है।
आतंकवादियों ने बदला प्रशिक्षण का स्वरूप!
भारतीय सुरक्षा बलों की सीमापार आतंकवादियों के खिलाफ नाकेबंदी और कड़े बन्दोंबस्त को चुनौती देने के लिए पाकिस्तान में आतंकवादी संगठन प्रशिक्षण के तौर-तरीकों को बदलकर अपने नापाक मंसूबो को अंजाम देने के लिए कमर कस रहे हैं। मुंबई आतंकी हमले के बाद सीमापार आतंकवादियों की घुसपैठ को रोकने के लिए सरकार द्वारा बरती जा रही चौकसी में भारतीय सुरक्षा बल भी सीमाओं पर कड़ी चौकसी बनाकर पूरी तरह से चौकस हैं। भारतीय सुरक्षा बलों को चुनौती देने के लिए पाकिस्तानी लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों ने प्रशिक्षण के तौरतरीकों में बदलाव करके ट्रेनिंग के नए पाठ्यक्रम तैयार करने शुरू कर दिये हैं इस बात का खुलसा भारत के खुफिया तंत्र कर चुके हैं। उच्च खुफिया सूत्रों के मुताबिक आतंक के आका आतंकियों की ट्रेनिंग को नए सिरे से सख्त बनाने में लगे हैं। आतंकवादियों को प्रशिक्षण के लिए भर्ती के दौरान हर आतंकी को उसकी क्षमता के अनुसार खास मिशन तैयार किया जा रहा है और हर आतंकी सदस्य के लिए अनिवार्य बुनियादी प्रशिक्षण के अलावा भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा जिसके लिए विशेष प्रशिक्षण केंद्र बनाया गया है। यह भी जानकारी मिल रही है कि आईएसआई और सेना के कुछ अधिकारी आतंकी संगठनों को हर तरह की मदद करने में पीछे नहीं हैं खासकर भारत के खिलाफ जेहाद के नाम पर आतंकी संगठनों को पाक खुफिया एजेंसी पूरी तरह से संलिप्त है। खुफिया विभाग के अनुसार आतंकियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को कुछ इसी तरह का नाम दिया है जिस प्रकार से शिक्षा संस्थानों में खास कोर्स का अध्ययन और प्रशिक्षण कराया जाता है। आतंकी संगठनों द्वारा यह प्रशिक्षण खास उद्देश्य को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे हैं। जिनमें युवाओं को भर्ती करके उनके प्रशिक्षण को बैच और सेमेस्टर में बांटा गया है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम ज्यादा उद्देश्योन्मुख और चयनात्मक बन गया है। सूत्रों के अनुसार इसका संपूर्ण ध्यान कमांडर तैयार करने पर केंद्रित है, ताकि सुरक्षा बलों को हराया जा सके। पुरानी ट्रेनिंग से अलग पूर्व में आतंकियों को हथियारों और विस्फोटों, घुसपैठ और सामूहिक नरसंहार के लिए के लिए दो स्तरीय प्रशिक्षण दिया जाता था, लेकिन नये प्रशिक्षण कार्यक्रम में उन युवाओं को एडवांस प्रशिक्षण दिया जाएगा, जो अपनी बोद्धिक और शारीरिक फिटनेस का परिचय देंगे। यह ट्रेनिंग बुनियादी रूप से तासीस कोर्स से शुरू होगी। यह धार्मिक होने के साथ आगे के प्रशिक्षण की जानकारी देगी। इस कोर्स की अवधि एक महीना होगी। हांलांकि लश्कर-ए-तैयबा की कोशिश इस प्रशिक्षण को 21 दिन में पूरा करने की है, इसके बाद तीन महीने का (अल राद) कोर्स की ट्रेनिंग शुरू होगी। इस चरण का एक महत्वपूर्ण पहलू प्रचार के माध्यम से आतंकी की विचारधारा को बदलना है। सात सेमेस्टर सभी आतंकियों को उपर्युक्त दो चरणों का प्रशिक्षण दिया जाता है, लेकिन इससे अलावा खास मिशन को ध्यान में रखते हुए आतंकियों को सैन्य ट्रेनिंग के रूप में विशेष प्रशिक्षण के लिए समूहों में विभाजित कर दिया जाता है। जिस प्रकार से मुंबई हमले के लिए कसाब जैसे आतंकी समूह को खास तौर पर मैरिन (समुद्री) आपरेशन के लिए तैयार किया गया था, जो सासे कठिन सैन्य प्रशिक्षण है। तीसरा चरण गुरिल्ला उन लोगों के लिए तैयार किया गया है जिन्हें समुद्र, जंगल, जमीन या शहरी परिदृश्य में अपना जौहर दिखाना होगा। यही इस खास प्रशिक्षण का उद्देश्य होगा। यह भी बताया गया है कि इसके बाद आतंकियों को अन्य एडवांस कोर्स करना होगा। इसमें आधुनिक हथियारों को चलाना सिखाया जाता है। खुफिया सूत्रो की माने तो यह प्रशिक्षण गुप्त रखा जाता है। यह समूह बहुत छोटे होते हैं जहां प्रत्येक आतंकी को उसके बेहतरीन कौशल के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। इस चरण में हर आतंकी बम लगाने और सुरक्षा बलों से निपटने के अलावा प्रशिक्षित शूटर बन जाता है। ट्रेनिंग का छठा और सांतवा चरण सासे कठिन है, जिसे भारतीय सुरक्षा एंजेंसियां भी सबसे खतरनाक मानती हैं। इस चरण में हवाई लक्ष्य के साथ बातचीत का कौशल सिखाया जाता है। बहरहाल भारतीय सुरक्षा बल भी आतंकवादियों की हर चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए तैयार हैं।

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